Monday, June 6, 2011

बाबा को नोएडा में अनशन की इजाजत नहीं, पुलिस कार्रवाई से यूपी में भड़के रामदेव समर्थक, हरिद्वार में अनशन करेंगे बाबा रामदेव



http://anaryan.hi5.com

बाबा को नोएडा में अनशन की इजाजत नहीं
Jun 05, 09:09 pm


लखनऊ [जाब्यू]। मायावती सरकार ने बाबा रामदेव को उत्तर प्रदेश की सीमा में अनशन करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। बाबा रामदेव ने राज्य सरकार से नोएडा के सेक्टर 39 में अनशन करने की अनुमति चाही थी। उप्र सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नजरिये से नोएडा या राज्य के किसी भी जिले में अनशन शुरू करने की अनुमति नहीं दी सकती है। सरकार के 'ना' करते ही रविवार की रात बाबा रामदेव ने जैसे ही उत्तराखण्ड राज्य से उप्र की सीमा में मुजफ्फर नगर जिले में प्रवेश किया, उन्हें रोक लिया गया और तुरंत वापस कर दिया गया। बाबा रामदेव ने घोषणा की है, अब वह उत्तराखण्ड राज्य के हरिद्वार में अनशन पर बैठेंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार को दिन में जैसे ही इस बात के संकेत मिलना शुरू हुए कि बाबा रामदेव केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली से सटी उप्र की सीमा में अनशन करना चाहते हैं, बसपा में शीर्ष स्तर पर बाबा को अनुमति देने या ना देने में राजनीतिक नफा-नुकसान का आंकलन शुरू हो गया था। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा भी था कि बाबा की तरफ से अभी कोई लिखित अनुरोध पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। अनुरोध पत्र मिलने पर कोई निर्णय किया जाएगा। देर शाम गौतमबुद्ध नगर के डीएम ने उप्र सरकार को सूचित किया कि बाबा रामदेव नोएडा के सेक्टर 39 में अनशन शुरू करना चाहते हैं, इसके तुरंत बाद गृह विभाग ने बैठक बुलाई, जिसमें अपर कैबिनेट सचिव रवींद्र सिंह ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श किया गया। यही कोई आधे घंटे चली बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि बाबा रामदेव के अनुरोध को खारिज कर दिया गया है।

बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के नोएडा में अनशन शुरू करने से पहले बाबा रामदेव ने हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में अनशन शुरू करने का प्लान तैयार किया था। बाबा रामदेव इसी जिले के रहने वाले हैं। चूंकि हरियाणा में कांग्रेस की सरकार है, इस वजह से वहां भी बाबा राम देव की बात नहीं बन सकी।

**************************************************************


पुलिस कार्रवाई से यूपी में भड़के रामदेव समर्थक
Jun 06, 01:16 am
बताएं
विडियो: बाबा रामदेव की गिरफ्तारी के खिलाफ सूबे में उबाल

लखनऊ। योग गुरु बाबा रामदेव की गिरफ्तारी व समर्थकों पर लाठीचार्ज के खिलाफ सूबे में उबाल है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए। सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए यज्ञ और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह , पीएम मनमोहन सिंह के पुतले फूंके गये। भाजपा और उसके अनुषंगिक संगठनों के अलावा समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रमों में हिस्सेदारी की।

लखनऊ में जहां सामाजिक कार्यकर्ताओं में भी आक्रोश दिखा वहीं केंद्र सरकार को सद् बुद्धि देने के लिए बुद्धि-शुद्धि यज्ञ भी किया गया। कार्यकर्ताओं ने सत्याग्रह के समर्थन में अनशन शुरू किया।

भाजपा ने भी बाबा के समर्थन में धरना शुरू कर दिया है। चारबाग स्थित दीनदयाल स्मृतिका पर धरने पर बैठने वालों में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही, राज्यसभा सदस्य कलराज मिश्र, कुसुम राय, टीवी कलाकार स्मृति इरानी समेत अन्य शामिल थे। गोंडा, बहराइच, लखीमपुर, सुल्तानपुर, सीतापुर और श्रावस्ती में भी भाजपा और अन्य हिन्दू संगठनों ने धरना-प्रदर्शन व केंद्र सरकार का पुतला फूंक कर गुस्सा जताया।

मेरठ में सुबह से ही सड़क पर उतरकर लोगों ने रोष जाहिर किया। कलक्ट्रेट पर धरना दिया गया। छात्रों ने जुलूस निकालकर केंद्र सरकार का पुतला फूंका।

मुजफ्फर नगर और बुलंदशहर में भी समर्थकों ने केंद्र सरकार का पुतला फूंका। सहारनपुर में बाबा रामदेव के समर्थकों के साथ व्यापारी संगठन और गैर कांग्रेसी पार्टियों के कार्यकर्ता भी सड़क पर उतर आए। बागपत में जगह-जगह केंद्र सरकार के खिलाफ जुलूस निकाला गया। बिजनौर में पालिका चौक पर जुटे कई संगठनों के सैकड़ों लोगों ने रविवार और सोमवार को काला दिवस के रूप में मनाने का एलान किया।

कानपुर में लोगों ने जगह-जगह धरना देकर पुलिस के इस कदम की निंदा की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पीरोड में केंद्र सरकार का पुतला फूंका और प्रधानमंत्री के विरुद्ध नारेबाजी की।

पतंजलि योग समिति ने शिक्षक पार्क नवीन मार्केट में अनशन कर बाबा के समर्थन में हुंकार भरी। धर्म संघ से जुड़े लोगों और रोडवेज कर्मचारियों ने फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा पर धरना दिया।

चित्रकूट में मंदाकिनी तट पर जुटे साधु-संतों ने बाबा का समर्थन करते हुए कहा कि आधी रात के बाद कार्रवाई कर केंद्र सरकार ने कायरता का परिचय दिया है।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि पूरा देश बाबा रामदेव के साथ खड़ा है। बांदा में आहुति देकर ईश्वर से नेताओं को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।

उरई में दर्जनों लोगों ने सीओ दफ्तर के बगल में काली पट्टी बांधकर धरना दिया। फर्रुखाबाद में भारत स्वाभिमान व पतंजलि योग समिति सोमवार को कलक्ट्रेट में काला दिवस मनायेगी। कन्नौज, रायबरेली में भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद, अधिवक्ताओं के साथ अन्य लोग भी सड़कों पर उतर आये। इटावा में बाबा समर्थकों ने काला दिवस मनाया। उन्नाव में पतंजलि योग समिति के सत्याग्रह स्थल पर पुलिस के कड़े पहरे के बीच कार्यकर्ताओं ने हवन कर केंद्र सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना की।

बरेली में कलक्ट्रेट गेट पर भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का अनशन जारी रहा। पीलीभीत में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए यज्ञ किया। आगरा में शनिवार को शहीद स्मारक पर शुरू हुआ भ्रष्टाचार मिटाओ सत्याग्रह आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। अलीगढ़ में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट एवं पतंजलि योग समिति ने विरोध में रैली निकाली तो भाजपा और संस्कार भारती ब्रज प्रांत की ओर से केंद्र सरकार के पुतले फूंके गए।

आजमगढ़ में रिक्शा स्टैंड पर लोगों ने उपवास रखकर धरना दिया और बाबा के साथ हुई कार्रवाई को सरकार की बर्बरता करार दिया। सरकार की सद्बुद्धि के लिए यज्ञ किया गया। बलिया, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर में धरना देकर इस कार्रवाई की निन्दा की गयी वहीं विद्यार्थी परिषद, भाजपा सहित अन्य संगठनों ने पुतला फूंक कर विरोध जताया। मऊ में भी लोगों में तीखा आक्रोश रहा। यहां पुतला फूंककर विरोध प्रकट किया। मीरजापुर व सोनभद्र में भी प्रधानमंत्री का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया गया।

गोरखपुर में पंतजलि योग समिति एवं भारत स्वाभिमान मंच के कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। भाजपा ने काली पट्टी बांधकर विरोध मार्च निकाला। भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने केन्द्र सरकार का पुतला फूंका। महराजगंज में प्रदर्शन कर काग्रेस विरोधी नारे लगाए गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने बांह में काली पट्टी बांध प्रमुख मार्गों पर प्रदर्शन किया।

कुशीनगर, देवरिया, बस्ती में बाबा की गिरफ्तारी और अनशन पर लाठीचार्ज के विरोध में धरना दिया गया। बाबा रामदेव व समर्थकों पर दमन के खिलाफ जनाक्रोश इलाहाबाद, कौशाम्बी और प्रतापगढ़ में फूट पड़ा। इलाहाबाद में सुबह दस बजे तक कचहरी पर सैकड़ों लोग जमा हो गए। चिलचिलाती धूप में समर्थक बाबा रामदेव के समर्थन में नारेबाजी करते हुए घंटों धरने पर बैठे रहे। भाजपा युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने जंक्शन पर पवन एक्सप्रेस रोककर बाबा पर हुए हमले पर विरोध प्रकट किया। इसके बाद ऐतिहासिक सुभाष चौराहा पर कांग्रेस पार्टी का पुतला फूंका।

कौशाम्बी में भाजपाइयों ने ककोढ़ा व भरवारी कस्बे में सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह व कपिल सिब्बल का पुतला दहन कर अपना आक्रोश जताया। प्रतापगढ़ में चाय-पान की दुकानों से लेकर जहां भी लोग इकट्ठा हुए, यही चर्चा होती रही।

गाजियाबाद में बाबा रामदेव को जबरन उठाने और हरिद्वार भेजने के विरोध में भाजपा कार्यकर्ता रविवार को सड़कों पर उतर आए। उन्होंने पहले केंद्र सरकार का पुतला फूंका फिर गांधी पार्क में धरना दिया। हिंदू मुस्लिम राष्ट्रीय एकता पार्टी ने इस हंगामे को लेकर प्रधानमंत्री से इस्तीफा व पुलिस कमिश्नर को निलंबित करने की मांग की है।

आक्रोश से तमतमाई रामनगरी

अयोध्या। योगगुरु बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के साथ हुए पुलिसिया दु‌र्व्यवहार से रामनगरी आक्रोश से भर उठी है। रामनगरी के प्रमुख मंदिरों व अखाड़ों के संतों ने एक स्वर से केंद्र सरकार की निंदा करते हुए कहा कि संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए। विश्व हिंदू परिषद ने इस मामले को लेकर 6 से 8 जून तक पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन करने की घोषणा की है।

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने कहा कि योगगुरु रामदेव का अपमान पूरे देश के संत समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो इस कार्यवाही के विरोध में वह राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव के वस्त्रों को पुलिस द्वारा उतारा जाना संत वेश व संत परंपरा का उल्लंघन है। इसे पूरे देश के संतों में आक्रोश है। राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि योगगुरु व उनके समर्थकों के साथ हुई बदसलूकी केंद्र सरकार की लोकतंत्र विरोधी नीतियों को उजागर करने वाली है।

दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने इसे केंद्र सरकार की तानाशाही की पराकाष्ठा बताया। राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य व पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार की जननी है, जिसने अपने लोगों को बचाने के लिए यह कार्रवाई की।

अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास ने कहा कि रामदेव का अपमान संत समाज भूल नहीं सकेगा। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद विनय कटियार ने कहा कि यह शर्मनाक कार्रवाई कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इशारे पर की गई है। कांग्रेस के कई बड़े नेताओं का धन विदेशी बैंकों में जमा है। उनके नाम उजागर होने से डर से केंद्र घबरा गई है। बलरामपुर में पत्रकारों से बात करते हुए विधायक व देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत कौशलेन्द्र नाथ ने रामदेव के साथ हुई अभद्रता को लोकतंत्र का अपहरण बताया।




**********************************************************************

गांधीवादी कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने एक बार फिर तेवर कड़े,बाबा रामदेव पर हुई कार्रवाई के विरोध में हजारे



http://anaryan.hi5.com

बीते अप्रैल में अनशन कर अपनी मांगें मनवा चुके गांधीवादी कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने एक बार फिर तेवर कड़े कर लिए हैं। बाबा रामदेव पर हुई कार्रवाई के विरोध में हजारे और उनके साथी सोमवार को होने वाली लोकपाल विधेयक मसौदा समिति की बैठक में शामिल नहीं होंगे और हजारे आठ जून को दिल्ली में एक दिन का अनशन भी करेंगे।

लोकपाल विधेयक मसौदा समिति में शामिल हजारे पक्ष ने अब यह भी शर्त रखी है कि वे तभी अगली बैठकों में शिरकत करेंगे, जब उसका सीधा वीडियो प्रसारण किया जाएगा।

हजारे ने कहा कि रामलीला मैदान में मध्यरात्रि को रामदेव और उनके समर्थकों के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ, उसकी हम निंदा करते हैं। कल की घटना लोकशाही और मानवता पर कलंक है। सरकार ने लोकशाही का गला घोंटने का काम किया है। कल रात रामलीला मैदान पर सोते हुए बच्चों और महिलाओं पर लाठीचार्ज करना कोई मानवीय कृत्य नहीं था।

उन्होंने कहा कि लोकपाल मसौदा समिति की बैठकों में भी सरकार बार-बार अपना रुख बदल रही है। वह पहले प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में शामिल करने पर मान गई थी, लेकिन बाद में वह इससे मुकर गई। हजारे ने कहा कि रामदेव पर कार्रवाई और लोकपाल मसौदा समिति की अब तक की बैठकों में दिखे सरकार के रुख के विरोध में हमने कल समिति की बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।

हजारे ने कहा कि हम इस बर्बरता के खिलाफ आठ जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिन का अनशन करेंगे। हम सभी देशवासियों से इस अनशन में शामिल होने की अपील करते हैं। रामदेव के साथ हुई घटना के बाद क्या उन्हें जंतर-मंतर पर अनशन कर पाने का भरोसा है, इस पर गांधीवादी नेता ने कहा कि क्या दिल्ली किसी की जागीर है? जब जान हथेली पर रखकर आंदोलन करो तो डर नहीं लगता।

बहरहाल, हजारे ने कहा कि अगर रामदेव भविष्य में किसी आंदोलन में उनके साथ जुड़ना चाहते हैं तो इससे पहले वह कुछ मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करना चाहेंगे। हजारे ने कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे से निपटने के प्रति सरकार उदासीन है। हम लोकपाल समिति की अब तक की बैठकों में केंद्र के रुख और कल की घटना को सरकार की इसी उदासीनता से जोड़कर देखते हैं। मुझे लगता है कि देश में बीते अप्रैल की तरह एक बार फिर आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है।

उधर, लोकपाल मसौदा समिति के सह-अध्यक्ष शांति भूषण ने कहा कि हम मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री राष्ट्र के समक्ष यह स्पष्ट करें कि ऐसे क्या कारण थे कि उनकी सरकार ने कल रात रामदेव पर इस तरह की पुलिस कार्रवाई के आदेश दिए। कल रात की बर्बर घटना वर्ष 1975 के आपातकाल की याद दिलाती है।

उन्होंने कहा कि हम लोकपाल समिति की अगली बैठकों में तभी शिरकत करेंगे, जब उसका सीधा वीडियो प्रसारण किया जाएगा। अगर सरकार एक मजबूत लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने में हिचकेगी तो हमारे पास फिर जंतर-मंतर जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रह जाएगा।

भूषण ने कहा कि हम विदेशों में जमा कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने की बाबा रामदेव की मांग का समर्थन करते हैं। लोकपाल मसौदा समिति में शामिल सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा कि समिति की बैठकों में सरकार के अब तक के रुख और कल रामदेव के साथ हुई घटना के विरोध में हम कल की बैठक का बहिष्कार कर रहे हैं। हम सरकार को कल एक पत्र लिखेंगे। उस पत्र पर सरकार के जवाब के आधार पर हम अगली बैठकों में शामिल होने के बारे में फैसला करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामदेव से उनके पक्ष के कोई मतभेद नहीं हैं।

गौरतलब है कि लोकपाल मसौदा समिति की 30 मई को हुई बैठक में सरकार और हजारे पक्ष के बीच प्रधानमंत्री और उच्च न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने को लेकर गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए थे। इसके बाद हजारे पक्ष की ओर से समिति से अलग होने की चेतावनी दी गई थी, जबकि सरकार ने राज्यों और राजनीतिक दलों को लोकपाल से जुड़े छह मुद्दों पर पत्र लिखकर उनकी राय मांगी थी। (भाषा)
**************************************************************

रामदेव पर कार्रवाई से रविशंकर निराश
Bookmark and Share Feedback Print
बेंगलुरु, रविवार, 5 जून 2011( 20:35 IST )
FILE
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव पर कार्रवाई को लेकर रविवार को निराशा जताई और कहा कि वे मध्य रात्रि को ही विदेशी दौरे से स्वदेश वापस लौट रहे हैं।

एक बयान में उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और भ्रष्टाचार एवं काला धन से लड़ने में और कृतसंकल्प रहने को कहा। बयान में कहा गया है कि रविशंकर बीच में ही विदेश का दौरा छोड़ रहे हैं और भारत लौट रहे हैं। (भाषा)

***********************************************************************

दोहराया गया 1975 का इतिहास


http://anaryan.hi5.com

दोहराया गया 1975 का इतिहास
Bookmark and Share Feedback Print
नई दिल्ली, रविवार, 5 जून 2011( 10:18 IST )
प्रभावी लोकपाल विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित संयुक्त समिति के सह अध्यक्ष शांतिभूषण ने कहा है कि रामलीला मैदान पर शनिवार रात वैसा ही हुआ है जैसा सन 1975 में 25 और 26 जून की रात हुआ था जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश पर इमरजेंसी थोपी थी।

शांतिभूषण ने घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र है तथा शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है।

उन्होंने कहा कि वह बाबा रामदेव के समर्थक नहीं हैं लेकिन रामलीला मैदान पर जैसी बर्बरतापूर्ण कार्रवाई हुई उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह और सरकार के मंत्री आज कठघरे में खड़े हैं।

उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान पर पुलिस कार्रवाई से लोगों की आंखें खुल जानी चाहिए कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई कितनी जोखिम भरी है उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार में डूबी सरकार भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए किसी भी सीमा तक गिर सकती है।

पुलिस कार्रवाई की तीखी निन्दा करने के बावजूद शांतिभूषण ने कहा कि प्रभावी लोकपाल विधेयक तैयार करने के लिए वह और उनके सहयोगी सरकार के साथ सहयोग करते रहेंगे। (भाषा)
****************************************************************************



गलत किया मगर आदेश मानना मजबूरी
Jun 06, 01:19 am
बताएं

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। शनिवार की रात रामलीला मैदान में जिन लोगों ने दिल्ली पुलिस का चेहरा देखा, उनके रोंगटे खड़े हो गए। चारों ओर पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की जा रही है। लोगों का कहना है कि आजादी के बाद देश की राजधानी में जलियावाला बाग कांड जैसी घटना को दोबारा देखा गया। हालांकि इस कांड पर दिल्ली पुलिस के कई डीसीपी व एसीपी समेत अन्य आला अधिकारियों का इस घटना पर कहना था कि वे तो सिर्फ सरकार के आदेश का पालन कर रहे हैं।

दबी जुबान में पुलिस अफसरों ने कहा कि वे अच्छी तरह समझ रहे हैं कि उनसे गलत कराया जा रहा है, लेकिन मजबूरी में उन्हें कार्रवाई करनी पड़ रही है।

पुलिस की दलीलों से साफ पता चल रहा था कि पूर्ण नियोजित व राजनीतिक दबाव में बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की गई। किंतु इस मसले पर पुलिस मुख्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान स्पेशल सीपी लॉ एंड ऑर्डर धर्मेद्र कुमार से जब राजनीतिक दबाव की बात पूछी गई तो उन्होंने ऐसा कुछ होने से इंकार कर दिया।
?*****************************************************************


मेरी हत्या की साजिश रची गई थी: रामदेव
Jun 05, 02:05 pm
बताएं

हरिद्वार। बीती मध्यरात्रि से जारी नाटकीय घटनाक्रमों के बाद बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रखने का ऐलान करते हुए रविवार को यहां सनसनीखेज दावा किया कि रामलीला मैदान पर उनकी हत्या करने की साजिश रची गई थी।

दिल्ली से हिरासत में लिए जाने के बाद रामदेव को चार्टर्ड प्लेन के जरिए देहरादून भेज दिया गया, जहां से वह हरिद्वार पहुंचे। यहां पहुंचने के कुछ ही देर बाद बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में रामदेव ने कल मध्यरात्रि के बाद हुए घटनाक्रमों का सिलसिलेवार ब्यौरा बताया और सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए।

रामदेव ने दावा किया कि सरकार की रामलीला मैदान पर लाशें बिछा देने की तैयारी थी और यदि हमारे कार्यकर्ता धैर्य से काम नहीं लेते तो वहां हजारों लोग मारे जाते।

उन्होंने कल की घटना की तुलना जलियांवाला बाग की घटना से करते हुए दावा किया, 'रामलीला मैदान पर मुझे गिरफ्तार करने के बाद मेरा एनकाउंटर करने या मुझे गायब कर देने की तैयारी थी। वहां मेरी हत्या करने की साजिश थी। जब तीन जून को दिल्ली के एक होटल में भी हमारी सरकार से बातचीत चल रही थी, तब भी रामलीला मैदान पर बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए थे।'

रामदेव ने कहा, 'यदि मेरे जीवन के समक्ष कोई खतरा उत्पन्न होता है तो इसकी जिम्मेदारी सोनिया गांधी और कांग्रेस की होगी।' उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी। लेकिन आगे क्या रणनीति अपनाई जाएगी, इस पर उन्होंने कहा कि वह शाम तक खुलासा करेंगे। उन्होंने कहा कि आज शाम और कल देश भर में उनके समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से 'काला दिवस' मनाएंगे।

योगगुरु ने कहा कि सरकार कालाधन पर अध्यादेश तो नहीं लाई, लेकिन उसने आपातकाल जैसा अत्याचार किया। योगगुरु के चेहरे पर परेशानी और चिंता साफ देखी जा सकती थी। वह महिलाओं की उसी पोशाक में मीडिया से मुखातिब हुए, जिसे पहनकर वह कल मध्यरात्रि के बाद रामलीला मैदान से बाहर निकले थे।

रामदेव ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत होने के बाद हमें यह धमकी दी गई थी कि या तो हम बात मान लें या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। इसलिए आचार्य बालकृष्ण से यह झूठ बोलकर दबाव में एक खत पर दस्तखत कराए गए कि चिट्ठी दिखाकर प्रधानमंत्री को विश्वास में लेना है।

उन्होंने कहा कि कल देर रात भी सरकार की ओर से जो चिट्ठी हमारे पास पहुंची, उसमें कालाधन के मुद्दे का कोई जिक्र नहीं था। उन्हाेंने कहा, 'कालीरात को जब मैं याद करता हूं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और मेरी आत्मा कांप उठती है। रामलीला मैदान पर कल मध्यरात्रि को जो हुआ वह बबर्रता की सारी हदें पार गया। मैंने वहां कार्रवाई करने आए पुलिसकर्मियों से निर्दोष महिलाओं और बच्चों पर लाठियां नहीं बरसाने का बार-बार अनुरोध किया, लेकिन रामलीला मैदान पर पुलिस का दमन चक्र चलता रहा।

रामदेव ने सीधे मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा, ''सिब्बल कुटिल और शातिर दिमाग के व्यक्ति हैं। उन्होंने हमारे साथ कुटिलता से चालें चलीं।' उन्होंने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बारे में भी कहा, 'जो लोग गैर-जिम्मेदार हैं और बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, उनके बारे में मैं टिप्पणी करना उचित नहीं समझता।'

आंदोलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा द्वारा प्रायोजित करने के आरोपों पर योगगुरु ने कहा कि उन्हें अन्य संगठनों और मुस्लिम समाज के लोगों का भी समर्थन था। तीन जून को तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने भी उनसे फोन पर बात कर समर्थन जताया था। अपने सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के बारे में उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में हैं और सुरक्षित हैं।

रामलीला मैदान पर सिर्फ योग शिविर करने की ही अनुमति होने से जुड़े सवाल पर रामदेव ने कहा कि योग के लिए हमने अनुमति ली थी और हजारों लोगों ने वहां योग किया भी। लेकिन योगासनों के बाद भ्रष्टाचार और कालाधन के मुद्दे पर जो उपवास किया गया, वह भी योग की मर्यादा और सीमा में आता है।

रामदेव ने कहा कि सरकार विदेशों में जमा कालाधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने, पेशेवर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में कराने, भ्रष्टाचार के मुकदमों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करने और लोक सेवा वितरण अधिनियम बनाने के लिए विधेयक पेश करने पर सहमत हो चुकी थी, लेकिन इस संबंध में वह लिखित आश्वासन नहीं दे रही थी।

उन्होंने कहा कि कालाधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने के बारे में अध्यादेश जारी करने को लेकर लिखित में आश्वासन नहीं देने के पीछे सरकार की यह दलील थी कि हम पहले अनशन खत्म कर दें।

रामदेव ने कहा कि सरकार के रुख से यह साफ होता है कि न न तो वह लोकपाल का गठन करना चाहती है और न न ही विदेशों में जमा कालाधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करना चाहती है। इसके पीछे कारण यह है कि कालाधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने से सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के कई नेता बेनकाब हो जाएंगे।

उन्होंने कहा, 'यह भी कहा जा रहा है कि मेरा अनशन प्रायोजित था। अगर प्रायोजित था तो फिर वहां मेरे समर्थकों पर लाठियां और आंसू गैस के गोले क्यों चलाए गए।'

सत्याग्रह पर सितम, इतिहास की सबसे काली रात


http://anaryan.hi5.com

सत्याग्रह पर सितम, इतिहास की सबसे काली रात

हरिद्वार, रविवार, 5 जून 2011( 15:38 IST )

दिल्ली के रामलीला मैदान से महिलाओं की वेशभूषा में बच निकलने का प्रयास करने वाले बाबा रामदेव ने चार जून की रात को इतिहास की काली रात बताते हुए कहा कि मुझे मारने की साजिश थी और रामलीला मैदान में मरना कोई बहादुरी का काम नहीं था इसलिए वहां से निकले।

सलवार कमीज पहने रामदेव ने कहा कि मैंने शौक के लिए यह कपड़े नहीं पहने हैं और मैं भेष बदलकर नहीं भागा लेकिन रामलीला मैदान में मारा जाना कोई बहादुरी नहीं थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मुझे मरवाने की योजना बना रखी थी और मैं रात को कार्रवाई के दौरान मंच से कूदकर एक दीवार के पास दो घंटे तक बैठा रहा।

दिल्ली से आज सुबह हरिद्वार पहुंचे योगगुरु ने कहा कि मरने से डरता तो यह काम नहीं करता लेकिन रामलीला मैदान में मरना कोई बहादुरी नहीं थी।

रामदेव ने कहा कि वहां महिलाओं का एक झुंड था वह उनके साथ शामिल होकर रामलीला मैदान से बाहर निकलने में सफल रहे और झुंड में ही पैदल चलने लगे, लेकिन कुछ कार्यकर्ताओं के मुंह से गलती से यह आवाज निकल गई कि ‘कोई पुलिस वाला नहीं आएगा’। इसके बाद पुलिस वाले सतर्क हो गए और उन्होंने मुझे पकड़ लिया।

बाबा ने कहा कि उनके गले में पड़े कपड़े को पुलिसकर्मियों ने फंदे की तरह पकड़ा, जिससे उनके गले में सूजन भी आ गए है। रामदेव के अनुसार कि मैंने पुलिस वालों से पूछा कि मैंने कालाधन, भ्रष्टाचार की बात करके कोई गुनाह नहीं किया है तो मेरे साथ अपराधी जैसा व्यवहार क्यों।

योगगुरु के चेहरे पर परेशानी और चिंता साफ देखी जा सकती थी। वह महिलाओं की उसी पोशाक में मीडिया से मुखातिब हुए, जिसे पहनकर वह कल मध्यरात्रि के बाद रामलीला मैदान से बाहर निकले थे।

रामदेव ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत होने के बाद हमें यह धमकी दी गई थी कि या तो हम बात मान लें या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। इसलिये आचार्य बालकृष्ण से यह झूठ बोलकर दबाव में एक खत पर दस्तखत कराए गए कि चिट्ठी दिखाकर प्रधानमंत्री को विश्वास में लेना है।

उन्होंने कहा कि कल देर रात भी सरकार की ओर से जो चिट्ठी हमारे पास पहुंची, उसमें कालेधन के मुद्दे का कोई जिक्र नहीं था।

उन्होंने कहा कि कालीरात को जब मैं याद करता हूं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और मेरी आत्मा कांप उठती है। रामलीला मैदान पर कल मध्यरात्रि को जो हुआ वह बबर्रता की सारी हदें पार गया। मैंने वहां कार्रवाई करने आए पुलिसकर्मियों से निर्दोष महिलाओं और बच्चों पर लाठियां नहीं बरसाने का बार-बार अनुरोध किया, लेकिन रामलीला मैदान पर पुलिस का दमन चक्र चलता रहा।

रामदेव ने सीधे मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘सिब्बल कुटिल और शातिर दिमाग के व्यक्ति हैं। उन्होंने हमारे साथ कुटिलता से चालें चलीं। उन्होंने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बारे में भी कहा कि जो लोग गैर-जिम्मेदार हैं और बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, उनके बारे में मैं टिप्पणी करना उचित नहीं समझता।

आंदोलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा द्वारा प्रायोजित करने के आरोपों पर योगगुरु ने कहा कि उन्हें अन्य संगठनों और मुस्लिम समाज के लोगों का भी समर्थन था। तीन जून को तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने भी उनसे फोन पर बात कर समर्थन जताया था। अपने सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के बारे में उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में हैं और सुरक्षित हैं।

रामलीला मैदान पर सिर्फ योग शिविर करने की ही अनुमति होने से जुड़े सवाल पर रामदेव ने कहा कि योग के लिए हमने अनुमति ली थी और हजारों लोगों ने वहां योग किया भी। लेकिन योगासनों के बाद भ्रष्टाचार और कालेधन के मुद्दे पर जो उपवास किया गया, वह भी योग की मर्यादा और सीमा में आता है।

रामदेव ने कहा कि सरकार विदेशों में जमा कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने, पेशेवर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में कराने, भ्रष्टाचार के मुकदमों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करने और लोक सेवा वितरण अधिनियम बनाने के लिए विधेयक पेश करने पर सहमत हो चुकी थी, लेकिन इस संबंध में वह लिखित आश्वासन नहीं दे रही थी।

उन्होंने कहा कि कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने के बारे में अध्यादेश जारी करने को लेकर लिखित में आश्वासन नहीं देने के पीछे सरकार की यह दलील थी कि हम पहले अनशन खत्म कर दें।

रामदेव ने कहा कि सरकार के रुख से यह साफ होता है कि न तो वह लोकपाल का गठन करना चाहती है और न न ही विदेशों में जमा कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करना चाहती है। इसके पीछे कारण यह है कि कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने से सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के कई नेता बेनकाब हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह भी कहा जा रहा है कि मेरा अनशन प्रायोजित था। अगर प्रायोजित था तो फिर वहां मेरे समर्थकों पर लाठियां और आंसू गैस के गोले क्यों चलाए गए। (भाषा)

*************************************************************************************
पतंजलि आश्रम पहुंचे बाबा रामदेव

नई दिल्ली, रविवार, 5 जून 2011( 12:17 IST )
बाबा रामदेव आज दिल्ली से विशेष विमान से देहरादून पहुंचे और वहां से उन्हें हरिद्वार स्थित पतंजलि आश्रम लाया गया। वे पूरी तरह सफेद कपड़ों में हैं। उन्होंने देहरादून एयरपोर्ट पर किसी से भी बातचीत नहीं की है।

योगगुरु बाबा रामदेव ने ओम् और गायत्री मंत्र का जाप करते हुए अपनी गिरफ्तारी दी थी। ऐतिहासिक रामलीला मैदान पर मध्यरात्रि के बाद करीब एक बजे जब पुलिस का दल बल पहुंचा तो बाबा ने पुलिस और अपने समर्थकों के बीच संभावित संघर्ष को टालने की भरपूर कोशिश की।

पुलिस बल के घेरे में रहते हुए भी बाबा ने अपने समर्थकों से कहा कि वे उत्तेजित नहीं हों। उन्होंने लोगों से ओम् और गायत्री मंत्र का उच्चारण भी कराया।

गिरफ्तारी के नाटकीय घटनाक्रम में लाठीचार्ज, पथराव और आंसूगैस के गोले छोड़े गए तथा मैदान पर अफरातफरी मच गई। इसी बीच पुलिस बाबा को मंच से हटाकर एक ओर ले गई।

चंडीगढ़ से आई एक बुजुर्ग महिला ने पुलिस कार्रवाई का आंखों देखा हाल बताते हुए कहा कि महिलाएं और बच्चे पुलिस ज्यादती का शिकार हुए। पुलिस ने बुजुर्ग महिला को भी मैदान से चले जाने को कहा।

महिला ने जब यह कहा कि वह चंडीगढ़ से आई है और कहां जाये तो पुलिसकर्मी ने बदतमीजी से कहा कि सड़क पर जाओ।

बाबा के एक निकट सहयोगी सम्पूर्णानंद के अनुसार पुलिस बल में एक भी महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। मध्यरात्रि के बाद सारे नियम कायदों को ताक पर रख कर पुलिस कार्रवाई की गई।

बाबा के संगठन भारत स्वाभिमान आंदोलन के एक पदाधिकारी के अनुसार वह भारत के मुख्य न्यायाधीश एचएस कपाड़िया से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को पुलिस कार्रवाई का संज्ञान लेना चाहिए। (एजेंसी)


***********************************************************************************

मेरी हत्या की साजिश-रामदेव
कहा- ...तो सोनिया और कांग्रेस जिम्मेदार

हरिद्वार, रविवार, 5 जून 2011( 22:33 IST )

बीती मध्यरात्रि से जारी नाटकीय घटनाक्रमों के बाद बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रखने की घोषणा करते हुए रविवार को यहां सनसनीखेज दावा किया कि रामलीला मैदान पर उनकी हत्या करने की साजिश रची गई थी।

दिल्ली से हिरासत में लिए जाने के बाद रामदेव को हेलिकॉप्टर के जरिए देहरादून भेज दिया गया, जहां से वे हरिद्वार पहुंचे। यहां पहुंचने के कुछ ही देर बाद बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में रामदेव ने कल मध्यरात्रि के बाद हुए घटनाक्रमों का सिलसिलेवार ब्योरा बताया और सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए।

लाशें बिछा देने की तैयारी थी : रामदेव ने दावा किया कि सरकार की रामलीला मैदान पर लाशें बिछा देने की तैयारी थी और यदि हमारे कार्यकर्ता धैर्य से काम नहीं लेते तो वहां हजारों लोग मारे जाते।

याद आया जलियांवाला : उन्होंने कल की घटना की तुलना जलियांवाला बाग की घटना से करते हुए दावा किया कि रामलीला मैदान पर मुझे गिरफ्तार करने के बाद मेरा एनकाउंटर करने या मुझे गायब कर देने की तैयारी थी। वहां मेरी हत्या करने की साजिश थी। जब तीन जून को दिल्ली के एक होटल में भी हमारी सरकार से बातचीत चल रही थी, तब भी रामलीला मैदान पर बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए थे।

...तो सोनिया जिम्मेदार : रामदेव ने कहा कि यदि मेरे जीवन के समक्ष कोई खतरा उत्पन्न होता है तो इसकी जिम्मेदारी सोनिया गांधी और कांग्रेस की होगी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी, लेकिन आगे क्या रणनीति अपनायी जाएगी, इसका जल्द ही खुलासा करेंगे।

आपातकाल जैसा अत्याचार : योगगुरु ने कहा कि सरकार कालेधन पर अध्यादेश तो नहीं लाई, लेकिन उसने आपातकाल जैसा अत्याचार किया। योगगुरु के चेहरे पर परेशानी और चिंता साफ देखी जा सकती थी। वे महिलाओं की उसी पोशाक में मीडिया से मुखातिब हुए, जिसे पहनकर कल मध्यरात्रि के बाद रामलीला मैदान से बाहर निकले थे।

हमें धमकी दी गई थी : रामदेव ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत होने के बाद हमें यह धमकी दी गई थी कि या तो हम बात मान लें या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। इसलिए आचार्य बालकृष्ण से यह झूठ बोलकर दबाव में एक खत पर दस्तखत कराए गए कि चिट्ठी दिखाकर प्रधानमंत्री को विश्वास में लेना है। उन्होंने कहा कि कल देर रात भी सरकार की ओर से जो चिट्ठी हमारे पास पहुंची, उसमें कालेधन के मुद्दे का कोई जिक्र नहीं था।

कांप जाती है आत्मा : उन्होंने कहा कि कालीरात को जब मैं याद करता हूं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और मेरी आत्मा कांप उठती है। रामलीला मैदान पर कल मध्यरात्रि को जो हुआ वह बर्बरता की सारी हदें पार गया। मैंने वहां कार्रवाई करने आए पुलिसकर्मियों से निर्दोष महिलाओं और बच्चों पर लाठियां नहीं बरसाने का बार-बार अनुरोध किया, लेकिन रामलीला मैदान पर पुलिस का दमन चक्र चलता रहा।

कुटिल हैं कपिल सिब्बल : रामदेव ने सीधे मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा कि सिब्बल कुटिल और शातिर दिमाग के व्यक्ति हैं। उन्होंने हमारे साथ कुटिलता से चालें चलीं। उन्होंने कांग्रेस महासचिव दिग्विजयसिंह के बारे में भी कहा कि जो लोग गैर-जिम्मेदार हैं और बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, उनके बारे में मैं टिप्पणी करना उचित नहीं समझता।

आंदोलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा द्वारा प्रायोजित करने के आरोपों पर योगगुरु ने कहा कि उन्हें अन्य संगठनों और मुस्लिम समाज के लोगों का भी समर्थन था। तीन जून को तेलुगू देशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने भी उनसे फोन पर बात कर समर्थन जताया था। अपने सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के बारे में उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में हैं और सुरक्षित हैं।

हमने नहीं लांघी मर्यादा : रामलीला मैदान पर सिर्फ योग शिविर करने की ही अनुमति होने से जुड़े सवाल पर रामदेव ने कहा कि योग के लिए हमने अनुमति ली थी और हजारों लोगों ने वहां योग किया भी, लेकिन योगासनों के बाद भ्रष्टाचार और कालेधन के मुद्दे पर जो उपवास किया गया, वह भी योग की मर्यादा और सीमा में आता है।

रामदेव ने कहा कि सरकार विदेशों में जमा कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने, पेशेवर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में कराने, भ्रष्टाचार के मुकदमों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करने और लोकसेवा वितरण अधिनियम बनाने के लिए विधेयक पेश करने पर सहमत हो चुकी थी, लेकिन इस संबंध में वह लिखित आश्वासन नहीं दे रही थी।

उन्होंने कहा कि कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने के बारे में अध्यादेश जारी करने को लेकर लिखित में आश्वासन नहीं देने के पीछे सरकार की यह दलील थी कि हम पहले अनशन खत्म कर दें।

...तो बेनकाब होंगे मंत्री और कांग्रेस नेता : रामदेव ने कहा कि सरकार के रुख से यह साफ होता है कि न तो वह लोकपाल का गठन करना चाहती है और न ही विदेशों में जमा कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करना चाहती है। इसके पीछे कारण यह है कि कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने से सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के कई नेता बेनकाब हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह भी कहा जा रहा है कि मेरा अनशन प्रायोजित था। अगर प्रायोजित था तो फिर वहां मेरे समर्थकों पर लाठियां और आंसू गैस के गोले क्यों चलाए गए। (भाषा)

****************************************************************************


रात में तेजी से बदला घटनाक्रम
Bookmark and Share Feedback Print
रविवार, 5 जून 2011( 10:24 IST )
राजधानी दिल्ली में मध्यरात्रि की पुलिस कार्रवाई के कुछ घंटे पहले और कुछ घंटे बाद का घटनाक्रम घड़ी की इन सुइयों के साथ हुआ।

* दस बजे बाबा को विमान से देहरादून ले जाया।
* सुबह लगभग 9 बजे रामदेव सफदरगंज हवाईअड्डे पर दिखाई दिए। दिल्ली से बाहर ले जाने की तैयारी।
* 5.00 बजे रामलीला मैदान लगभग खाली हो गया।
* तड़के 4.10 बजे रामलीला मैदान पर बिजली काटी गई।
* 3.15-4.00 बजे के बीच पुलिस ने मंच और टेंटों को उखाड़ना शुरू कर दिया।
* 2.45 से 3.15 बजे के बीच पुलिस बाबा को गिरफ्तार कर अज्ञात स्थान पर ले गई।
* मध्यरात्रि के बाद 2.00 से 3.00 बजे के बीच पुलिस ने रामलीला मैदान पर आंसूगैस के गोले छोड़े। समर्थकों की भीड़ तितर-बितर हो गई।
* 2.00 से 2.30 बजे बाबा अपने समर्थकों के पास मंच पर गए। पुलिस ने मंच को घेरे में ले लिया। समर्थकों ने पुलिसकर्मियों को मंच पर चढ़ने से रोका।
* मध्यरात्रि के बाद 1.15 पुलिस बल मंच पर पहुंचा जहां बाबा सोए हुए थे। बाबा के समर्थकों ने उन्हें अपने घेरे में ले लिया तथा मंच के नीचे ले गए। समर्थकों ने बाबा को कंधे पर उठा लिया।
* पांच जून मध्यरात्रि के बाद 12.30 बजे से एक बजे : सैंकडों पुलिस कर्मियों ने रामलीला मैदान पर धावा बोला। पुलिस अधिकारियों ने बाबा को गिरफतार करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनके पास मैदान को सवेरे तक खाली कराने के आदेश हैं।
* शाम साढ़े सात बजे सरकार की कार्रवाई से क्षुब्ध बाबा रामदेव ने सरकार पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया और अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने की घोषणा की।
* शाम सवा सात बजे केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने प्रेस कांफ्रेंस में बाबा रामदेव का कथित पत्र सार्वजनिक किया।
* चार जून शाम सात बजे सरकार ने बाबा रामदेव को फोनकर मानी मांग। (वार्ता/वेबदुनिया न्
************************************************************************

मीडिया को भगाने के लिए पुलिस ने काटा बिजली कनेक्शन


http://anaryan.hi5.com

मीडिया को भगाने के लिए पुलिस ने काटा बिजली कनेक्शन
Jun 06, 12:58 am

नई दिल्ली, जासं : रामलीला मैदान में दिल्ली पुलिस की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई को जब मीडिया कर्मी कैमरे में कैद कर लाइव दिखा रहे थे, उसी समय पंडाल की बिजली काट दी गई। इससे पंडाल में अंधेरा पसर गया। अंधेरा होने के बावजूद मीडिया कर्मी पंडाल में ही डटे रहे।

तड़के सवा चार बजे पुलिस ने मीडिया कर्मियों को भी पंडाल खाली करने को कहा था। इस पर मीडिया कर्मियों ने जब पुलिस अधिकारियों से इसका कारण पूछा तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। उनकी मंशा थी कि अगर मीडिया के लोग भी पंडाल से चले जाएं तो उनकी बर्बरतापूर्ण कार्रवाई पर किसी की नजर नहीं जाएगी और वे अपनी मनमर्जी से कुछ भी कर सकेंगे। जब मीडिया कर्मी वहां से नहीं हटे तो खुन्नस में आकर पुलिस ने पूरे पंडाल का बिजली कनेक्शन काट दिया।


**********************************************************

भगदड़ में जा सकती थी सैकड़ों जानें
Jun 05, 08:20 pm
बताएं

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता : रामलीला मैदान में शनिवार रात पुलिस आधी रात उस समय पंडाल में पहुंची जिस समय बाबा समेत उनके सभी समर्थक व मीडियाकर्मी गहरी नींद में सो रहे थे। अचानक हजारों पुलिसकर्मियों की एक साथ कार्रवाई से पंडाल में अफरा-तफरी मच गई। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सभी इधर-उधर भागने लगे। शुक्र है कि कोई हताहत नहीं हुआ। वरना, जिस तरह कार्रवाई की गई, उससे भगदड़ में सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी।

पुलिस ने यहां सबसे बड़ी चूक यह कि पंडाल में बने तीन आपातकालीन गेट नहीं खोले। हमदर्द चौराहे की तरफ वाले केवल एक गेट को ही खुला रहने दिया गया। उस समय पंडाल में 60 हजार लोग थे। भगदड़ मची तो सभी एक-दूसरे को धक्का देते, गिरते-पड़ते भागने लगे। जो गिर गया, कुचला गया। पुलिस के डंडे व कुचले जाने से सैकड़ों लोग बेहोश हो गए। जब भीड़ कम हुई तब पुलिस ने कुछ लोगों को वहां से उठाकर पास के अस्पताल में पहुंचाया और कुछ को वहीं छोड़ दिया गया। पंडाल में हर तरफ लोगों की चप्पल, जूते व सामान बिखरा पड़ा था। नजारा साफ बयां कर रहा था कि कानून के रखवाली पुलिस ने ही कानून की किस कदर धज्जियां उड़ाई हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि आसूं गैस के गोले खाली मैदान व सड़कों पर छोड़े जाते हैं, किंतु चारदीवारी के बीच बंद पंडाल में इस तरह की कार्रवाई गलत है।


**********************************************************************

आसूं गैस छोड़ने से पंडाल में लगी आग
Jun 05, 08:30 pm
बताएं

नई दिल्ली, जासं : रामलीला मैदान में शनिवार रात आंसू गैस के गोले छोड़ने से पंडाल में आग भी लग गई। बंद पंडाल में आसू गैस के गोले छोड़ने व खुद को हजारों की संख्या में पुलिसकर्मियों से घिरा देख लोगों के दिल में डर समा गया। लोगों को आशंका थी कि कहीं पुलिस उन पर गोलियां न चला दें। इन्हीं वजहों से पंडाल में डर व दम घुटने के कारण सैकड़ों लोग बेहोश हो गए। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का भी यही मानना है।

यहां सवाल है कि आग अगर पूरे पंडाल में फैल जाती तब क्या होता। आखिर इस घटना के लिए तब कौन जिम्मेदार होता। पुलिस के लिए सवाल तो कई हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। वे अपने कार्रवाई से संतुष्ट है।

रामलीला मैदान में दिल्ली पुलिस की हैवानियत,


http://anaryan.hi5.com

गुस्साई महिलाओं ने फाड़ी डीसीपी की वर्दी
Jun 05, 09:51 pm
बताएं

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता : रामलीला मैदान में दिल्ली पुलिस की हैवानियत देख पंडाल छोड़ सड़कों पर आई महिलाओं को अपशब्द कहना पूर्वी जिले के डीसीपी दिनेश कुमार गुप्ता को महंगा पड़ गया। गुस्साई महिलाओं ने उनकी वर्दी फाड़ दी। किसी तरह से बचकर वे भाग निकले। समर्थकों के अनुसार डीसीपी शराब पीकर मौके पर आए थे।

रविवार तड़के सवा चार बजे जब पंडाल से सभी को बाहर खदेड़ दिया गया, तब बाबा के कई समर्थक पंडाल के चारों तरफ सड़कों पर आ गए थे। जगह-जगह महिलाओं व पुरुषों का जत्था खड़े होकर या बैठकर पुलिस बर्बरता पर चर्चा कर रहे थे। जाकिर हुसैन कॉलेज की लालबत्ती पर हजारों की संख्या में पुलिस बल ने मोर्चा संभाल रखा था। वाटर केनन, पुलिस बस, फायर बिग्रेड आदि से लैस पुलिसकर्मी सड़कों को सील कर वहां मुस्तैद थे। तभी ठीक चौराहे पर 25-30 की संख्या में सड़क के बीचोबीच खड़े महिलाओं के एक जत्थे को पूर्वी जिले के डीसीपी डीके गुप्ता ने कुछ अपशब्द कह दिया। अपशब्द सुनते ही महिलाओं ने उन्हें घेर लिया और चिपट पड़ी। तभी महिलाओं को बदबू से लगा वे शराब पीकर आए हैं। इस पर उन्होंने जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। वे बार-बार महिलाओं के चंगुल से खुद को छुड़ा दूर भाग जाते थे और बार बार महिलाएं उनके पास आकर घेर लेती थीं। करीब 15 मिनट तक यह सिलसिला चलता रहा। उस समय चौराहे पर डीसीपी प्रभाकर समेत अन्य कई डीसीपी, महिला पुलिस व हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी थे, लेकिन वे उनके बचाव में आगे नहीं आ रहे थे। जब डीके गुप्ता ने गुस्से में चिल्लाना शुरू कर दिया तब जाकर कुछ महिला पुलिसकर्मी भीड़ में घुसीं, लेकिन तब तक डीके गुप्ता खुद महिलाओं के चंगुल से छुड़ाकर तेजी से दौड़ लगाते हुए कुछ दूर खड़ी कार के पास चले गए। चालक भी कार स्टार्ट कर पहले से तैयार था। तुरंत कार का दरवाजा खोल उनके बैठते ही कार तेजी से वहां से चल पड़ी। खींचतान में उनकी वर्दी भी फाड़ दी गई। हजारों पुलिसकर्मियों के मौके पर रहते हुए डीसीपी के जान बचाकर भागने से यह पता चलता है कि कहीं न कहीं उनकी गलती थी। गलती पकड़ में न आ जाए इसलिए वे जान बचाकर वहां से भाग गए।

रामलीला मैदान में शनिवार मध्य रात्रि हुआ पुलिसिया तांडव


http://anaryan.hi5.com

भयावह था पुलिस का चेहरा
Jun 05, 10:47 pm

प्रदीप कुमार सिंह, नई दिल्ली

रामलीला मैदान में शनिवार मध्य रात्रि हुआ पुलिसिया तांडव बाबा भक्तों के लिए भयावह था। हर तरफ चीख-पुकार के बीच पुलिस अनशनकारियों पर लाठियां बरसाने में जुटी थी। इस बीच आंसू गैस के गोले भी दागे गए। खुशकिस्मती थी कि पंडाल में आग नहीं लगी, वरना यह रात देश के लिए काली रात बन जाती। सत्याग्रह को कुचलने के लिए पुलिस ने जो बर्बर तरीका अपनाया, उसे अब आला अफसर उचित ठहराने में जुटे हुए हैं। इस संबंध में कमला मार्केट थाने में दंगा भड़काने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने व सरकारी ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से मारपीट का मामला दर्ज किया गया है। पुलिसिया कार्रवाई में कई सौ कार्यकर्ता घायल हुए। इनमें से कई की हालत गंभीर है।

भजन-कीर्तन के बाद सत्याग्रही जब नींद में थे, रात एक बजे पुलिसिया कार्रवाई शुरू हुई। कई हजार पुलिस व रैपिड एक्शन के जवानों ने पंडाल नाकेबंदी कर दी। रामलीला मैदान के आसपास सभी मार्गो को सील कर दिया गया। खुद पुलिस आयुक्त बीके गुप्ता ने पंडाल के अंदर और बाहर से चारों तरफ घूमकर नाकेबंदी का जायजा लिया। मैदान का केवल एक गेट खुला रखा गया। पुख्ता इंतजाम के बाद कई आला अफसरों की मौजूदगी में पुलिस व रैपिड एक्शन के जवान पंडाल में घुस गए और सत्याग्रहियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। पुलिस ने बाबा रामदेव को साथ ले जाने का प्रयास किया तो उनके समर्थक बचाव में आगे आ गए। अफरातफरी के बीच बाबा मंच से नीचे कूद पड़े। कुछ भक्तों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया। एक तरफ बाबा भक्तों को शांति बनाए रखने की अपील कर रहे थे, दूसरी तरफ पुलिस भक्तों पर लाठियां भांज रही थी। मंच को निशाना बना कर आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिए। पंडाल में हर तरफ धुआं ही धुआं फैल गया। लोगों की आंखों में जलन शुरू हो गई। पंडाल में भी आग की लपटें उठने लगीं। गनीमत थी कि शिविर में अग्नि से बचाव के इंतजाम थे। एक भक्त ने अग्निशमन उपकरण से आग पर काबू पाया। धुएं का फायदा उठा बाबा रामदेव पुलिस की आंखों से ओझल हो गए।

इसके बाद पुलिसकर्मियों ने किसी को नहीं बख्शा। बुजुर्ग, बच्चों व महिलाओं तक पर लाठियां भांजी गई। महिलाओं को पकड़कर खींचा और बुजुर्गो के हाथ-पांव पकड़कर घसीटा गया। कई महिलाओं के कपड़े तक फट गए। सत्याग्रही गिड़गिड़ा रहे थे, आधी रात को कहां जाएंगे। हरियाणा, आंध्रप्रदेश, झारखंड से कई महिलाएं अकेली ही आई थीं। उन्होंने हाथ जोड़कर पुलिसकर्मियों से सुबह तक वहां ठहरने देने की अनुमति मांगी, मगर उनकी किसी ने नहीं सुनी। करीब दो घंटे तक पुलिसिया तांडव चलता रहा। इस दौरान पुलिस ने पंडाल की लाइट तक काट दी। पुलिस ने पंडाल में बने तीन आपातकालीन गेट नहीं खोले। हमदर्द चौराहे की तरफ वाले केवल एक गेट को ही खुला रहने दिया गया। उस समय पंडाल में 60 हजार लोग मौजूद थे। भगदड़ मची तो सभी एक-दूसरे को धक्का देते, गिरते-पड़ते भागने लगे। जो गिर गया, कुचला गया। पुलिस के डंडे व कुचले जाने से सैकड़ों लोग बेहोश हो गए। जब भीड़ कम हुई तब पुलिस ने कुछ लोगों को वहां से उठाकर पास के अस्पताल में पहुंचाया। पंडाल में हर तरफ लोगों की चप्पल, जूते व सामान बिखरा पड़ा था। सभी को बाहर खदेड़ने के बाद पुलिस ने मैदान सील कर दिया। पंडाल से हिरासत में लिए गए लोगों को बसों में बिठाकर दिल्ली की सीमा पर ले जाकर छोड़ दिया गया। 71 घायलों को लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार लोगों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया।

विशेष पुलिस आयुक्त (लॉ एंड ऑर्डर) धर्मेद्र कुमार के अनुसार 'बाबा रामदेव की जान को खतरा था और बड़ी तादाद में उनके समर्थकों के रविवार को दिल्ली पहुंचने की सूचना थी। इसलिए उनके योग शिविर की अनुमति रद्द की गई।' शिविर की अनुमति रद्द होने और समर्थकों को वहां से जाने के लिए बोल दिया गया था। मध्य रात्रि 11 बजे ही इस संबंध में बाबा को अवगत करा दिया गया था।

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजन भगत ने कहा, पुलिस जब बाबा को हिरासत में लेने का प्रयास कर रही थी तो उनके समर्थकों ने हाथापाई व धक्का-मुक्की की। ईट व कुर्सियां भी फेंकी गई। नतीजतन, 62 लोगों को चोटें आई। इनमें 23 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के आठ गोले दागे।

ऐसे गिरफ्तार हुए बाबा

पुलिस मान रही थी कि कार्रवाई के बाद बाबा रामदेव बचकर निकल गए, लेकिन वह पंडाल के पीछे स्थित दो दीवारों के बीच खाली जगह में दो घंटे तक छिपे रहे। तड़के करीब सवा चार बजे पंडाल के पीछे की तरफ से कुछ महिलाओं के साथ बाबा निकले तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान बाबा रामदेव से धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस बाबा रामदेव को सीधे सफदरजंग एयरपोर्ट पर ले गई। सुबह तक यहां रखने के बाद विशेष विमान से उन्हें देहरादून के लिए रवाना कर दिया गया।