Saturday, October 3, 2009

Health - Very Very Important Tips


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Health - Very Very Important Tips

Answer the phone by LEFT ear.

Do not drink coffee TWICE a day.

Do not take pills with COLD water.

Do not have HUGE meals after 5pm .

Reduce the amount of OILY food you consume.

Drink more WATER in the morning, less at night.

Keep your distance from hand phone CHARGERS.

Do not use headphones/earphone for LONG period of time.

Do not lie down immediately after taking medicine before sleeping.

When battery is down to the LAST grid/bar, do not answer the phone as the radiation is 1000 times.

[h1]21 advices[/h1]
ONE. Give people more than they expect and do it cheerfully.

TWO. Marry a man/woman you love to talk to. As you get older, their conversational skills will be as important as any other.

THREE. Don't believe all you hear, spend all you have or sleep all you want.

FOUR. When you say, 'I love you,' mean it.

FIVE. When you say, 'I'm sorry,' look the person in the eye.

SIX. Be engaged at least six months before you get married.

SEVEN. Believe in love at first sight.

EIGHT. Never laugh at anyone's dreams. People who don't have dreams don't have much.

NINE. Love deeply and passionately. You might get hurt but it's the only way to live life completely.

TEN.. In disagreements, fight fairly. No name calling.

ELEVEN. Don't judge people by their relatives.

TWELVE. Talk slowly but think quickly.

THIRTEEN! . When someone asks you a question you don't want to answer, smile and ask, 'Why do you want to know?'

FOURTEEN. Remember that great love and great achievements involve great risk.

FIFTEEN. Say 'bless you' when you hear someone sneeze.

SIXTEEN. When you lose, don't lose the lesson.

SEVENTEEN. Remember the three R's: Respect for self; Respect for others; and Responsibility for all your actions.

EIGHTEEN. Don't let a little dispute injure a great friendship.

NINETEEN. When you realize you've made a mistake, take immediate steps to correct it.

TWENTY. Smile when picking up the phone. The caller will hear it in your voice.

TWENTY- ONE. Spend some time alone.

Friday, October 2, 2009

प्यार को कभी भी किया नहीं जा सकता। प्यार तो अपने आप हो जाता है।


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प्यार को कभी भी किया नहीं जा सकता। प्यार तो अपने आप हो जाता है।
दिन और रात...
धरती और आसमान,
एक दूसरे के बिना सब अधूरे हैं।
सन -सन करती हवाएं, सुन्दर नजारे, फूलों की खुशबू ..............
सभी में छिपा होता है प्यार... ........
कुछ तो प्यार में हारकर भी जीत जाते हैं, तो कुछ जीतकर भी अपना प्यार हार जाते हैं।

प्यार एक ऐसा नशा है जिसमें जो डूबता है वो ही पार होता है। प्यार पर किसी का वश नहीं होता.... अगर आप भी प्यार महसूस करना चाहते हैं तो डूबिये किसी के प्यार में ... दुनिया की सबसे बड़ी नेमत है ढाई आखर का प्यार... जब आप भी किसी को चाहने लगते हैं तो उसके दूर होने पर भी आपको नजदीक होने का अहसास होने लगता है , हर चेहरे में आप उसका चेहरा ढूंढने की असफल कोशिश करते हैं, कोई पल ऐसा न गुजरता होगा जब उसका नाम आपके होठों पर न रहता हो ... यही तो होता है प्यार... सुन्दर, सुखद , निश्छल और पवित्र अहसास। पूरी दुनिया के सुख इस प्रेम में समाए हुए हैं। यह शब्द छोटा होते हुए भी सभी शब्दों में बड़ा महसूस होता है।

उनको ये शिकायत है.. मैं बेवफ़ाई पे नही लिखता,


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उनको ये शिकायत है.. मैं बेवफ़ाई पे नही लिखता,
और मैं सोचता हूँ कि मैं उनकी रुसवाई पे नही लिखता.'

'ख़ुद अपने से ज़्यादा बुरा, ज़माने में कौन है ??
मैं इसलिए औरों की.. बुराई पे नही लिखता.'

'कुछ तो आदत से मज़बूर हैं और कुछ फ़ितरतों की पसंद है ,
ज़ख़्म कितने भी गहरे हों?? मैं उनकी दुहाई पे नही लिखता.'

'दुनिया का क्या है हर हाल में, इल्ज़ाम लगाती है,
वरना क्या बात?? कि मैं कुछ अपनी.. सफ़ाई पे नही लिखता.'

'शान-ए-अमीरी पे करू कुछ अर्ज़.. मगर एक रुकावट है,
मेरे उसूल, मैं गुनाहों की.. कमाई पे नही लिखता.'

'उसकी ताक़त का नशा.. "मंत्र और कलमे" में बराबर है !!
मेरे दोस्तों!! मैं मज़हब की, लड़ाई पे नही लिखता.'

'समंदर को परखने का मेरा, नज़रिया ही अलग है यारों!!
मिज़ाज़ों पे लिखता हूँ मैं उसकी.. गहराई पे नही लिखता.'

'पराए दर्द को , मैं ग़ज़लों में महसूस करता हूँ ,
ये सच है मैं शज़र से फल की, जुदाई पे नही लिखता.'

'तजुर्बा तेरी मोहब्बत का'.. ना लिखने की वजह बस ये!!
क़ि 'शायर' इश्क़ में ख़ुद अपनी, तबाही पे नही लिखताउनको ये शिकायत है.. मैं बेवफ़ाई पे नही लिखता,
और मैं सोचता हूँ कि मैं उनकी रुसवाई पे नही लिखता.'

'ख़ुद अपने से ज़्यादा बुरा, ज़माने में कौन है ??
मैं इसलिए औरों की.. बुराई पे नही लिखता.'

'कुछ तो आदत से मज़बूर हैं और कुछ फ़ितरतों की पसंद है ,
ज़ख़्म कितने भी गहरे हों?? मैं उनकी दुहाई पे नही लिखता.'

'दुनिया का क्या है हर हाल में, इल्ज़ाम लगाती है,
वरना क्या बात?? कि मैं कुछ अपनी.. सफ़ाई पे नही लिखता.'

'शान-ए-अमीरी पे करू कुछ अर्ज़.. मगर एक रुकावट है,
मेरे उसूल, मैं गुनाहों की.. कमाई पे नही लिखता.'

'उसकी ताक़त का नशा.. "मंत्र और कलमे" में बराबर है !!
मेरे दोस्तों!! मैं मज़हब की, लड़ाई पे नही लिखता.'

'समंदर को परखने का मेरा, नज़रिया ही अलग है यारों!!
मिज़ाज़ों पे लिखता हूँ मैं उसकी.. गहराई पे नही लिखता.'

'पराए दर्द को , मैं ग़ज़लों में महसूस करता हूँ ,
ये सच है मैं शज़र से फल की, जुदाई पे नही लिखता.'

'तजुर्बा तेरी मोहब्बत का'.. ना लिखने की वजह बस ये!!
क़ि 'शायर' इश्क़ में ख़ुद अपनी, तबाही पे नही लिखताउनको ये शिकायत है.. मैं बेवफ़ाई पे नही लिखता,
और मैं सोचता हूँ कि मैं उनकी रुसवाई पे नही लिखता.'

'ख़ुद अपने से ज़्यादा बुरा, ज़माने में कौन है ??
मैं इसलिए औरों की.. बुराई पे नही लिखता.'

'कुछ तो आदत से मज़बूर हैं और कुछ फ़ितरतों की पसंद है ,
ज़ख़्म कितने भी गहरे हों?? मैं उनकी दुहाई पे नही लिखता.'

'दुनिया का क्या है हर हाल में, इल्ज़ाम लगाती है,
वरना क्या बात?? कि मैं कुछ अपनी.. सफ़ाई पे नही लिखता.'

'शान-ए-अमीरी पे करू कुछ अर्ज़.. मगर एक रुकावट है,
मेरे उसूल, मैं गुनाहों की.. कमाई पे नही लिखता.'

'उसकी ताक़त का नशा.. "मंत्र और कलमे" में बराबर है !!
मेरे दोस्तों!! मैं मज़हब की, लड़ाई पे नही लिखता.'

'समंदर को परखने का मेरा, नज़रिया ही अलग है यारों!!
मिज़ाज़ों पे लिखता हूँ मैं उसकी.. गहराई पे नही लिखता.'

'पराए दर्द को , मैं ग़ज़लों में महसूस करता हूँ ,
ये सच है मैं शज़र से फल की, जुदाई पे नही लिखता.'

'तजुर्बा तेरी मोहब्बत का'.. ना लिखने की वजह बस ये!!
क़ि 'शायर' इश्क़ में ख़ुद अपनी, तबाही पे नही लिखता

किसी के इतने पास न जा, के दूर जाना खौफ़ बन जाये


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किसी के इतने पास न जा

के दूर जाना खौफ़ बन जाये

एक कदम पीछे देखने पर

सीधा रास्ता भी खाई नज़र आये


किसी को इतना अपना न बना

कि उसे खोने का डर लगा रहे

इसी डर के बीच एक दिन ऐसा न आये

तु पल पल खुद को ही खोने लगे


किसी के इतने सपने न देख

के काली रात भी रन्गीली लगे

आन्ख खुले तो बर्दाश्त न हो

जब सपना टूट टूट कर बिखरने लगे


किसी को इतना प्यार न कर

के बैठे बैठे आन्ख नम हो जाये

उसे गर मिले एक दर्द

इधर जिन्दगी के दो पल कम हो जाये


किसी के बारे मे इतना न सोच

कि सोच का मतलब ही वो बन जाये

भीड के बीच भी

लगे तन्हाई से जकडे गये


किसी को इतना याद न कर

कि जहा देखो वोही नज़र आये

राह देख देख कर कही ऐसा न हो

जिन्दगी पीछे छूट जाये

Wednesday, September 30, 2009

क्या कहूँ के कैसा हूँ मैं


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क्या कहूँ के कैसा हूँ मैं
सात सुरों के जैसा हूँ मैं
मुझको लगता है क्यूँ ऐसा
ये सारा जग है मुझ जैसा
प्यारे बादल जैसा हूँ मैं
तुम जो मानों वैसा हूँ मैं
क्या कहूँ के कैसा हूँ मैं
मैं हूँ गहरा सागर जैसा
मैं छोटी सी गागर जैसा
नील गगन का कोई परिंदा
मैं मोहब्बत का बाशिंदा
मदमस्त हवा के जैसा हूँ मैं
सच में बिलकुल ऐसा हूँ मैं
क्या कहूँ के कैसा हूँ मैं

..My entire body is shaking

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..My entire body is shaking
From the fear and anticipation
I've messed everything up
And I just can't seem to take it
So I make a slice just for you
Right across the vein
I watch the blood trinkle down my arm
And feel the slow release of pain
Adrenaline pumps throughout my body
Like tiny warning signs
I make another cut
And wipe a tear from my eye
Still shaking I begin to fade
In and out of unconsciousness once again
I feel the world floating away
And the fun now begins
It all starts now
Like an all time high
Another one won't hurt
That's not enough to die
It's like and addiction
That I can't seem to control
So I quit holding back
And let all the blood flow........

क्या पता कल हो ना हो ....


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आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो

आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो

आज एक बार मन्दिर हो आओ
पुजा कर के प्रसाद भी चढाओ
क्या पता कल के कलयुग मे
भगवान पर लोगों की श्रद्धा हो ना हो

बारीश मे आज खुब भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल ये बारीश भी हो ना हो

आज हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय से पहले पुरा करो
क्या पता आज की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो

आज एक बार चैन की नीन्द सो जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता कल जिन्दगी मे चैन
और आखों मे कोई सपना हो ना हो

क्या पता
कल हो ना हो ....