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साथ होकर भी जाने क्यूं.... तन्हाई का एह्सास है...
हाथ थामे रहता है कोई... फ़िर भी लगता खाली हाथ है...
जाने कैसा सूनापन गहराया.....
चलती हूं जिस भीड़ में.... इंसानों का नहीं....
बस परछांईयों का साथ है.....
'सच'... में जीने को जाने क्यूं.... दिल करता ही नहीं....
अजनबी रिश्तों में.... जिंदगी की तलाश है.....
ख्वाब नहीं कोई..... बस एक झूठा सच है ये.....
जलेगा नहीं दीप कोई..... ये बुझती लौ सी आस है....
भटकता है 'मन' दर-ब-दर... खाता है ठोकरें......
इसे उजड़ी बस्ती में.... घर की तलाश है....
तेज हवाओं के रुख से.....
यहां डरता है कौन.....???
ये तो बारिश से... भड़कने वाली आग है.....
बुझे- बुझे से जज्बात..... सहमी-सहमी जुबां....
सूखे हुये पानी से.... गला अब तर होता नहीं.....
ये गीले आंसूओं से.... बुझने वाली प्यास है....
जाने कहां खोया है खुद को.....
मुझे ही नहीं.... आईने को भी.....
मेरे अक्स की तलाश है........
Hi this is Manthan Aryan is here. ***************************** आसमा से उपर.... एक उड़ान की ख़्वाहिश है..!! जहाँ हो हर क़दम सितारो पर.... उस ज़मीन की ख़्वाहिश है..!! जहाँ पहचान हो लहू की हर एक बूँद की.... उस नाम की ख़्वाहिश है..!! जहाँ खुदा भी आके मुझसे पूछे..... "बता, क्या लिखू तेरे मुक्क़दर मे....?" उस मुकाम की ख़्वाहिश है..!! *************************** इस अजनबी सी दुनिया में, अकेला इक ख्वाब हूँ. सवालों से खफ़ा, चोट सा जवाब हूँ. जो ना समझ सके, उनके लिये “कौन”. जो समझ चुके, उनके लिये किताब हूँ
Tuesday, February 17, 2009
सूरज तो रोज ही आता है मगर , अपने दिलो में ‘ दीप ‘ को जला कर रखना
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अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।
छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।
उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।
वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।
रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।
तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।
हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।
मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना ।
मरना जीना बस में कहाँ है अपने ,
हर पल में जिन्दगी का लुफ्त उठाये रखना ।
दर्द कभी आखरी नहीं होता ,
अपनी आँखों में अश्को को बचा कर रखना ।
मंज़िल को पाना जरुरी भी नहीं ,
मंज़िलो से सदा फासला रखना ।
सूरज तो रोज ही आता है मगर ,
अपने दिलो में ‘ दीप ‘ को जला कर रखना
अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।
छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।
उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।
वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।
रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।
तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।
हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।
मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना ।
मरना जीना बस में कहाँ है अपने ,
हर पल में जिन्दगी का लुफ्त उठाये रखना ।
दर्द कभी आखरी नहीं होता ,
अपनी आँखों में अश्को को बचा कर रखना ।
मंज़िल को पाना जरुरी भी नहीं ,
मंज़िलो से सदा फासला रखना ।
सूरज तो रोज ही आता है मगर ,
अपने दिलो में ‘ दीप ‘ को जला कर रखना
Sunday, February 15, 2009
इसलिए इस दोस्ती को कभी अलविदा ना कहना...!!
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ऐसा दोस्त चाहिए जो हमे अपना मान सके,
जो हमारे दिल को जान सके,
चल रहे है हम तेज़ बारिश मे,
फिर भी पानी मे से आँसुओ को पहचान सके!!!!
ख़ुश्बू की तरह मेरी सांसो मे रहना
लहू बनके मेरी नसनस मे बहना,
दोस्ती होती है रिश्तो का अनमोल गेहना
इसलिए इस दोस्ती को कभी अलविदा ना कहना...!!
ऐसा दोस्त चाहिए जो हमे अपना मान सके,
जो हमारे दिल को जान सके,
चल रहे है हम तेज़ बारिश मे,
फिर भी पानी मे से आँसुओ को पहचान सके!!!!
ख़ुश्बू की तरह मेरी सांसो मे रहना
लहू बनके मेरी नसनस मे बहना,
दोस्ती होती है रिश्तो का अनमोल गेहना
इसलिए इस दोस्ती को कभी अलविदा ना कहना...!!
Friday, February 13, 2009
क्या है सच्चा प्यार ?

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क्या है सच्चा प्यार ? आओ सुनो एक कहानी एक चिडिया को एक सफ़ेद गुलाब से प्यार हो गया , उसने गुलाब को प्रपोस किया , गुलाब ने जवाब दिया की जिस दिन मै लाल हो जाऊंगा उस दिन मै तुमसे प्यार करूँगा , जवाब सुनके चिडिया गुलाब के आस पास काँटों में लोटने लगी और उसके खून से गुलाब लाल हो गया, ये देखके गुलाब ने भी उससे कहा की वो उससे प्यार करता है पर तब तक चिडिया मर चुकी थी इसीलिए कहा गया है की सच्चे प्यार का कभी भी इम्तहान नहीं लेना चाहिए, क्यूंकि सच्चा प्यार कभी इम्तहान का मोहताज नहीं होता है , ये वो फलसफा; है जो आँखों से बया होता है , ये जरूरी नहीं की तुम जिसे प्यार करो वो तुम्हे प्यार दे , बल्कि जरूरी ये है की जो तुम्हे प्यार करे तुम उसे जी भर कर प्यार दो, फिर देखो ये दुनिया जन्नत सी लगेगी प्यार खुदा की ही बन्दगी है ,खुदा भी प्यार करने वालो के साथ रहता है, यकीन करो मेरा ...... आज्मालेना कभी............
जब दिल उब जाए हमसे तोह बता देना
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आपसे दोस्ती हम यूं ही नही कर बैठे,
क्या करे हमारी पसंद ही कुछ "ख़ास" है. .
चिरागों से अगर अँधेरा दूर होता,
तोह चाँद की चाहत किसे होती.
कट सकती अगर अकेले जिन्दगी,
तो दोस्ती नाम की चीज़ ही न होती.
कभी किसी से जीकर ऐ जुदाई मत करना,
इस दोस्त से कभी रुसवाई मत करना,
जब दिल उब जाए हमसे तोह बता देना,
न बताकर बेवफाई मत करना.
दोस्ती सची हो तो वक्त रुक जता है
अस्मा लाख ऊँचा हो मगर झुक जता है
दोस्ती मे दुनिया लाख बने रुकावट,
अगर दोस्त सचा हो तो खुदा भी झुक जता है.
दोस्ती वो एहसास है जो मिटती नही.
दोस्ती पर्वत है वोह, जोह झुकता नही,
इसकी कीमत क्या है पूछो हमसे,
यह वो "अनमोल" मोटी है जो बिकता नही . . .
सची है दोस्ती आजमा के देखो..
करके यकीं मुझपर मेरे पास आके देखो,
बदलता नही कभी सोना अपना रंग ,
चाहे जितनी बार आग मे जला के देखो
****************************************************************
कोई दोस्त ऐसा बनाया जाये,
जिसके आसुओं को पलकों में छुपाया जाए,
रहे उसका मेरा रिश्ता कुछ ऐसा,
की अगर वो रहे उदास तो हमसे भी न मुस्कुराया जाये
आपने अपनी आँखों में नूर छुपा रखा है,
होश वालो को दीवाना बना रखा है,
नाज़ कैसे न करू आपकी दोस्ती पर,
मुज जैसे नाचीज को खास बना रखा है...
फूल सुख जाते है एक वक्त के बाद,
लोग बदल जाते है एक वक़्त के बाद,
अपनी दोस्ती भी टूटेगी एक वक़्त के बाद,
लेकिन वोह वक़्त आयेगा मेरी मौत के बाद...
हम दोस्ती में हद ए गुज़र जायेंगे ,
यह जिंदगी आपके नाम कर जायेंगे,
आप रोया करेंगे हमे याद करके,
आपके दामन में इतना प्यार छोड़ जायेंगे..
तुझे देखे बिना तेरी तस्वीर बना सकता हूँ,
तुझसे मिले बिना तेरा हाल बता सकता हूँ,
है मेरी दोस्ती में इतना दम,
अपनी आँख का आँसू तेरी आँख से गिरा सकता हूँ
दोस्ती इन्सान की ज़रूरत है,
दिलो पे दोस्ती की हुकूमत है ,
जिंदा है आपकी दोस्ती की वजह से
आपसे दोस्ती हम यूं ही नही कर बैठे,
क्या करे हमारी पसंद ही कुछ "ख़ास" है. .
चिरागों से अगर अँधेरा दूर होता,
तोह चाँद की चाहत किसे होती.
कट सकती अगर अकेले जिन्दगी,
तो दोस्ती नाम की चीज़ ही न होती.
कभी किसी से जीकर ऐ जुदाई मत करना,
इस दोस्त से कभी रुसवाई मत करना,
जब दिल उब जाए हमसे तोह बता देना,
न बताकर बेवफाई मत करना.
दोस्ती सची हो तो वक्त रुक जता है
अस्मा लाख ऊँचा हो मगर झुक जता है
दोस्ती मे दुनिया लाख बने रुकावट,
अगर दोस्त सचा हो तो खुदा भी झुक जता है.
दोस्ती वो एहसास है जो मिटती नही.
दोस्ती पर्वत है वोह, जोह झुकता नही,
इसकी कीमत क्या है पूछो हमसे,
यह वो "अनमोल" मोटी है जो बिकता नही . . .
सची है दोस्ती आजमा के देखो..
करके यकीं मुझपर मेरे पास आके देखो,
बदलता नही कभी सोना अपना रंग ,
चाहे जितनी बार आग मे जला के देखो
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कोई दोस्त ऐसा बनाया जाये,
जिसके आसुओं को पलकों में छुपाया जाए,
रहे उसका मेरा रिश्ता कुछ ऐसा,
की अगर वो रहे उदास तो हमसे भी न मुस्कुराया जाये
आपने अपनी आँखों में नूर छुपा रखा है,
होश वालो को दीवाना बना रखा है,
नाज़ कैसे न करू आपकी दोस्ती पर,
मुज जैसे नाचीज को खास बना रखा है...
फूल सुख जाते है एक वक्त के बाद,
लोग बदल जाते है एक वक़्त के बाद,
अपनी दोस्ती भी टूटेगी एक वक़्त के बाद,
लेकिन वोह वक़्त आयेगा मेरी मौत के बाद...
हम दोस्ती में हद ए गुज़र जायेंगे ,
यह जिंदगी आपके नाम कर जायेंगे,
आप रोया करेंगे हमे याद करके,
आपके दामन में इतना प्यार छोड़ जायेंगे..
तुझे देखे बिना तेरी तस्वीर बना सकता हूँ,
तुझसे मिले बिना तेरा हाल बता सकता हूँ,
है मेरी दोस्ती में इतना दम,
अपनी आँख का आँसू तेरी आँख से गिरा सकता हूँ
दोस्ती इन्सान की ज़रूरत है,
दिलो पे दोस्ती की हुकूमत है ,
जिंदा है आपकी दोस्ती की वजह से
Wednesday, January 28, 2009
खुश्क आंखो मे कई बार झलक जाती है
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जो तुम चाहते हो, उसे पाने की कोशिश करो! अन्यथा तुम उसे पाने के लिए मजबूर हो जाओगे!
खुश्क आंखो मे कई बार झलक जाती है
खुशी मिलते ही आंखो से टपक जाती है
गमो के दौर मे ना पुछो कभी हलात इसकी
खामोशीओ मे भी ये साफ नज़र आती है
कभी मेहफिल तो कभी तन्हाई मे चुप के
कभी चमन तो कभी बाघो मे रुक के
जब कभी अपनो की याद सताती है
मोती बन के पल भर मे बिखर जाती है
उम्र का कोई तालुक नही दरमियान इस के
कभी मौका तो कभी दस्तूर ये निभाती है
बगैर इसके तो ज़िन्दगी भी अधुरी है शायद
कभी अपने तो कभी गैरो का एहसास दिलाती है
खुश्क आंखो मे कई बार झलक जाती है
खुशी मिलते ही आंखो से टपक जाती
Woh Zindagi hi kya jisme Mohabbat nahi,
Woh Mohabbat hi kya jisme Yaadein nahi,
Woh Yaadein kya jisme Tum nahi,
Aur woh Tum hi kya jiske saath Hum nahi.
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