Tuesday, July 26, 2011

कारगिल विजय दिवस: जरा याद करो कुर्बानी


कारगिल विजय दिवस: जरा याद करो कुर्बानी
‘हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्’।
(या तो तू युद्ध में बलिदान देकर स्वर्ग को प्राप्त करेगा अथवा विजयश्री प्राप्त कर पृथ्वी का राज्य भोगेगा।)
गीता के इसी श्लोक को प्रेरणा मानकर भारत के शूरवीरों ने कारगिल युद्ध में दुश्मन को पाँव पीछे खींचने के लिए मजबूर कर दिया था।

26 जुलाई 1999 के दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था। इसी की याद में ‘26 जुलाई’ अब हर वर्ष कारगिल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

यह दिन है उन शहीदों को याद कर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पण करने का, जो हँसते-हँसते मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। यह दिन समर्पित है उन्हें, जिन्होंने अपना आज हमारे कल के लिए बलिदान कर दिया।



कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि : कारगिल युद्ध जो कारगिल संघर्ष के नाम से भी जाना जाता है, भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में मई के महीने में कश्मीर के कारगिल जिले से प्रारंभ हुआ था।

इस युद्ध का कारण था बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों व पाक समर्थित आतंकवादियों का लाइन ऑफ कंट्रोल यानी भारत-पाकिस्तान की वास्तविक नियंत्रण रेखा के भीतर प्रवेश कर कई महत्वपूर्ण पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लेह-लद्दाख को भारत से जोड़ने वाली सड़क का नियंत्रण हासिल कर सियाचिन-ग्लेशियर पर भारत की स्थिति को कमजोर कर हमारी राष्ट्रीय अस्मिता के लिए खतरा पैदा करना।

पूरे दो महीने से ज्यादा चले इस युद्ध (विदेशी मीडिया ने इस युद्ध को सीमा संघर्ष प्रचारित किया था) में भारतीय थलसेना व वायुसेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल पार न करने के आदेश के बावजूद अपनी मातृभूमि में घुसे आक्रमणकारियों को मार भगाया था। स्वतंत्रता का अपना ही मूल्य होता है, जो वीरों के रक्त से चुकाया जाता है।

हिमालय से ऊँचा था साहस उनका : इस युद्ध में हमारे लगभग 527 से अधिक वीर योद्धा शहीद व 1300 से ज्यादा घायल हो गए, जिनमें से अधिकांश अपने जीवन के 30 वसंत भी नही देख पाए थे। इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया, जिसकी सौगन्ध हर सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है।

इन रणबाँकुरों ने भी अपने परिजनों से वापस लौटकर आने का वादा किया था, जो उन्होंने निभाया भी, मगर उनके आने का अन्दाज निराला था। वे लौटे, मगर लकड़ी के ताबूत में। उसी तिरंगे मे लिपटे हुए, जिसकी रक्षा की सौगन्ध उन्होंने उठाई थी। जिस राष्ट्रध्वज के आगे कभी उनका माथा सम्मान से झुका होता था, वही तिरंगा मातृभूमि के इन बलिदानी जाँबाजों से लिपटकर उनकी गौरव गाथा का बखान कर रहा था।

भारत के वीर सपूत :

‘ये दिल माँगे मोर’ - हिमाचलप्रदेश के छोटे से कस्बे पालमपुर के 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के कैप्टन विक्रम बत्रा उन बहादुरों में से एक हैं, जिन्होंने एक के बाद एक कई सामरिक महत्व की चोटियों पर भीषण लड़ाई के बाद फतह हासिल की थी।

यहाँ तक कि पाकिस्तानी लड़ाकों ने भी उनकी बहादुरी को सलाम किया था और उन्हें ‘शेरशाह’ के नाम से नवाजा था। मोर्चे पर डटे इस बहादुर ने अकेले ही कई शत्रुओं को ढेर कर दिया। सामने से होती भीषण गोलीबारी में घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी डेल्टा टुकड़ी के साथ चोटी नं. 4875 पर हमला किया, मगर एक घायल साथी अधिकारी को युद्धक्षेत्र से निकालने के प्रयास में माँ भारती का लाड़ला विक्रम बत्रा 7 जुलाई की सुबह शहीद हो गया। अमर शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा को अपने अदम्य साहस व बलिदान के लिए मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैनिक पुरस्कार ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।

17 जाट रेजिमेंट के बहादुर कैप्टन अनुज नायर टाइगर हिल्स सेक्टर की एक महत्वपूर्ण चोटी ‘वन पिंपल’ की लड़ाई में अपने 6 साथियों के शहीद होने के बाद भी मोर्चा सम्भाले रहे। गम्भीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने अतिरिक्त कुमुक आने तक अकेले ही दुश्मनों से लोहा लिया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय सेना इस सामरिक चोटी पर भी वापस कब्जा करने में सफल रही।
इस वीरता के लिए कैप्टन अनुज को मरणोपरांत भारत के दूसरे सबसे बड़े सैनिक सम्मान ‘महावीर चक्र’ से नवाजा गया।

राजपूताना राइफल्स के मेजर पद्मपाणि आचार्य भी कारगिल में दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए। उनके भाई भी द्रास सेक्टर में इस युद्ध में शामिल थे। उन्हें भी इस वीरता के लिए ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।



1/11 गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज पांडेय की बहादुरी की इबारत आज भी बटालिक सेक्टर के ‘जुबार टॉप’ पर लिखी है। अपनी गोरखा पलटन लेकर दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में ‘काली माता की जय’ के नारे के साथ उन्होंने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए। अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में लड़ते हुए मनोज पांडेय ने दुश्मनों के कई बंकर नष्ट कर दिए।

गम्भीर रूप से घायल होने के बावजूद मनोज अंतिम क्षण तक लड़ते रहे। भारतीय सेना की ‘साथी को पीछे ना छोडने की परम्परा’ का मरते दम तक पालन करने वाले मनोज पांडेय को उनके शौर्य व बलिदान के लिए मरणोपरांत ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।

भारतीय वायुसेना भी इस युद्ध में जौहर दिखाने में पीछे नहीं रही, टोलोलिंग की दुर्गम पहाडियों में छिपे घुसपैठियों पर हमला करते समय वायुसेना के कई बहादुर अधिकारी व अन्य रैंक भी इस लड़ाई में दुश्मन से लोहा लेते हुए शहीद हुए। सबसे पहले कुर्बानी देने वालों में से थे कैप्टन सौरभ कालिया और उनकी पैट्रोलिंग पार्टी के जवान। घोर यातनाओं के बाद भी कैप्टन कालिया ने कोई भी जानकारी दुश्मनों को नहीं दी।

स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा का विमान भी दुश्मन गोलीबारी का शिकार हुआ। अजय का लड़ाकू विमान दुश्मन की गोलीबारी में नष्ट हो गया, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और पैराशूट से उतरते समय भी शत्रुओं पर गोलीबारी जारी रखी और लड़ते-लड़ते शहीद हो गए। फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता इस युद्ध में पाकिस्तान द्वारा युद्धबंदी बनाए गए।

वीरता और बलिदान की यह फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। भारतीय सेना के विभिन्न रैंकों के लगभग 30,000 अधिकारी व जवानों ने ऑपरेशन विजय में भाग लिया।

युद्ध के पश्चात पाकिस्तान ने इस युद्ध के लिए कश्मीरी आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया था, जबकि यह बात किसी से छिपी नहीं थी कि पाकिस्तान इस पूरी लड़ाई में लिप्त था। बाद में नवाज शरीफ और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से पाक सेना की भूमिका को स्वीकार किया था। यह युद्ध हाल के ऊँचाई पर लड़े जाने वाले विश्व के प्रमुख युद्धों में से एक है। सबसे बड़ी बात यह रही कि दोनों ही देश परमाणु हथियारों से संपन्न हैं।

पर कोई भी युद्ध हथियारों के बल पर नहीं लड़ा जाता है, युद्ध लड़े जाते हैं साहस, बलिदान, राष्ट्रप्रेम व कर्त्तव्य की भावना से और हमारे भारत में इन जज्बों से भरे युवाओं की कोई कमी नहीं है।

मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, मगर इनकी यादें हमारे दिलों में हमेशा- हमेशा के लिए बसी रहेंगी...

‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मिटने वालों ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मिटने वालों का यही बाकी निशाँ होगा।



आज की पीढ़ी के सामने दो मिसालें हैं, देश का माथा ऊंचा करने वाले जाबांज सपूत और देश को शर्मसार करने वाले घोटालेबाज, आप कौन सी मिसाल अपनाना चाहेंगे?

Saturday, June 11, 2011

सरदार पटेल ने पूरा नहीं होने दिया पं. नेहरू का ख्वाब


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सरदार पटेल ने पूरा नहीं होने दिया पं. नेहरू का ख्वाब

Jun 11, 09:11 am


अहमदाबाद [शत्रुघ्न शर्मा]। अयोध्या के विवादित ढांचे से देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू भी कहीं न कहीं जुड़े थे। वह पांचवे दशक में सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर सरकारी खजाने से विवादित ढांचे का पुनर्निर्माण कराना चाहते थे, लेकिन लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने उनकी इच्छा को परवान नहीं चढ़ने दिया। सरदार पटेल ने इसके लिए सरकारी खजाने से एक रुपया भी देने से साफ इंकार कर दिया।

पटेल की दलील थी कि सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार जनभागीदारी से हुआ है। ऐसे में विवादित ढांचे का पुनर्निर्माण सरकारी खजाने से कराने का प्रश्न ही नहीं उठता।

यह खुलासा सरदार पटेल की बेटी मणीबेन की डायरी के अंशों से हुआ है। सरदार पटेल मेमोरियल ट्रस्ट अहमदाबाद मणीबेन की इस डायरी के पुर्नप्रकाशन की तैयारी कर रहा है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इस ट्रस्ट के अध्यक्ष दिनशा पटेल वर्तमान में मनमोहन सरकार के काबीना मंत्री हैं। डायरी के जल्द बाजार में आने की संभावना है। इसके बाजार में आने पर कांग्रेस की मुसीबत बढ़ सकती है।

मणीबेन की डायरी के अंशों में साफ कहा गया है कि कांग्रेस की हिंदू विरोधी मानसिकता पं. नेहरू के जमाने से चली आ रही है। कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति पुरानी है, क्योंकि उसने हमेशा मुसलमानों को वोट बैंक के नजरिये से आंका।

डायरी के अंशों में आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महात्मा गांधी, पं. नेहरू, सुभाष चन्द्र बोस और सरदार पटेल में तमाम मुद्दों पर गंभीर मतभेदों की बात भी शिद्दत से स्वीकारी गई है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि सरदार पटेल चूंकि महात्मा गांधी का काफी सम्मान करते थे। इसलिए वह उनके निर्देशों का पालन किया करते थे।

डायरी में कश्मीर, हैदराबाद रियासत के एकीकरण के मुद्दे पर नेहरु व सरदार में मतभेद की बात भी कबूली गई है। इसमें कहा गया है कि कश्मीर को लेकर नेहरु के राजनीतिक प्रयासों को सरदार ने बचपना तक कह दिया था।

उड़ीसा में आईजीपी की नियुक्ति पर 21 सितंबर 1950 की एक घटना का उल्लेख करते हुए मणीबेन ने डायरी में उल्लेख किया है कि प.नेहरू तथा मौलाना आजाद इस स्तर पर भी राष्ट्रवादी विचारधारा के बजाए हिंदू-मुस्लिम के रूप में सोचते थे। डायरी में इसे विकृत धर्मनिरपेक्षता बताते हुए सरदार के लिए बाधक बताया गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे तथा योग गुरु बाबा रामदेव भले आज भ्रष्टाचार तथा लोकपाल बिल की लड़ाई लड़ रहे हों ,लेकिन जुलाई 1950 को खुद सरदार पटेल ने रफी अहमद किदवई तथा फिरोज गाधी पर रिश्वत लेकर लाईसेंस बेचने के सबूत देने के बावजूद नेहरू चुप रहे। अगस्त 1950 में किदवई ने यहा तक कह दिया था कि उनके खिलाफ कार्रवाई हुई तो वे नेहरु को ब्लैकमेल करेगे।

मणिबेन ने मुसलमानों को भारत माता काऐसा छोटा बेटा बताया है जिसे जानबूझकर इस दलदल में धकेला गया है।

ट्रस्ट के संयुक्त सचिव प्रभाकर खमार बताते है कि इनसाइड स्टोरी ऑफ सरदार पटेल-द डायरी ऑफ मणीबेन पटेल 1934-1950 में देश की राजनीति के उन स्याह पन्नों पर प्रकाश डाला गया है जो अभी तक अछूते थे। डायरी में सरदार की प्रतिभा को समस्याओं से संघर्षरत् यौद्धा के रूप में उभारा गया है।

Tuesday, June 7, 2011

काले धन पर और समिति की जरूरत नहीं... रामलीला मैदान में घायल राजबाला की हालत गंभीर



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काले धन पर और समिति की जरूरत नहीं
Jun 07, 08:32 pm

नई दिल्ली। काले धन के खिलाफ कार्रवाई के लिए बन रही समिति और अध्ययन के बहाने भ्रष्ट राजनेताओं, बिजनेसमैनों और नौकरशाहों को अपने अवैध धन को मुखौटा कंपनियों में लगाने का मौका मिल जाएगा। यह कहना जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स स्टडीज एंड प्लानिंग के प्रमुख प्रोफेसर अरुण कुमार का।

उन्होंने कहा कि अध्ययन, समितियां या नई विशेष जांच शाखा का गठन और विदेशी सरकारों के साथ संधियां कार्रवाई को लटकाने के लिए हैं। 'द ब्लैकमनी इन इंडिया' किताब के लेखक कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा काले धन पर अध्ययन शुरू करने या समितियां बनाने से भ्रष्टचार में लिप्त उच्चपदस्थ अधिकारियों और राजनेताओं को अपना पैसा विदेशों में कंपनियों में लगाने का मौका मिल जाएगा।

उन्होंने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने अवैध धन का निवेश अफ्रीकी खनन उद्योग में किया।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पालिसी की प्रोफेसर इला पटनायक का भी कमोबेश यही मानना है। उन्होंने कहा कि कर से जुड़े अपराधों पर नियंत्रण के लिए आपराधिक जांच निदेशालय [डीसीआइ] जैसी एजेंसी की जरूरत नहीं है। उल्लेखनीय है कि काले धन को लेकर बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने हाल ही में डीसीआइ का गठन किया था।

कुमार ने कहा कि सरकार संदिग्ध लोगों की टेलीफोन बातचीत के टेप के आधार पर जांच एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर कार्रवाई कर सकती है।

काली अर्थव्यवस्था का हिस्सा 1971 में वांचो समिति के आकलन, सात प्रतिशत से बढ़कर हालिया ग्लोबल इंटेग्रिटी रिपोर्ट की मुताबिक 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कुमार ने कहा, 60 के दशक में दर्जनों समितियों ने काले धन के विभिन्न पहलुओं पर अध्ययन किया और हजारों सलाह दी। जिसमें सैकड़ों सलाहों का उपयोग भी किया गया। इसके बावजूद काली अर्थव्यवस्था का आकार काफी हद तक बढ़ा हो गया।


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रामलीला मैदान में घायल राजबाला की हालत गंभीर
Jun 07, 05:59 pm

नई दिल्ली। रामलीला मैदान पर शनिवार की आधी रात में बाबा रामदेव और उनके समर्थकों पर पुलिसिया कार्रवाई में घायल हुए 71 लोगों में से 51 वर्षीय राजबाला की हालत आज लगातार तीसरे दिन भी गंभीर बनी हुई है।

वह दिल्ली के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में आईसीयू में वेंटिलेटर पर हैं। राजबाला का उपचार कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि वह सचेत हैं और सामान्य मौखिक संकेतों को समझ रहीं हैं।

हालाकि उनकी हालत अभी गंभीर है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।

गुड़गाव की रहने वाली राजबाला को रीढ़ की हड्डी में चोट के साथ जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के एक डॉक्टर ने कहा कि उनकी हालत अब भी गंभीर है। कल उनकी सर्विकल स्पाइनल पर चोटों के लिए सर्जरी की गई। उनके शरीर का गर्दन से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त है।

इसके अलावा एक और समर्थक की हालत गंभीर बनी हुई है जिसे सिर में चोट के बाद लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ रिचा दीवान ने कहा कि हमारे यहा केवल एक मरीज भर्ती है और बाकी सब को छुट्टी दे दी गई है। उन्हें भी स्वस्थ होने के बाद जल्द ही छुट्टी दे दी जाएगी।

पुलिस के 'मैदान मारने' की कहानी में कई पेंच....










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पुलिस के 'मैदान मारने' की कहानी में कई पेंच



नई दिल्ली, मंगलवार, 7 जून 2011( 14:03 IST )

रामलीला मैदान में भूखे-सोए लोगों पर कहर बरपाने वाली दिल्ली पुलिस की कहानी में कई पेंच है। इसमें सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि बाबा रामदेव की दी गई कड़ी जेडप्लस सुरक्षा इस पूरे ड्रामे के दौरान कहां गायब हो गई थी। क्या ऐसे में बाबा पर जानलेवा हमला नहीं हो सकता था। लाठीचार्ज नहीं करने का पुलिसिया दावा भी बेदम नजर आता है। खुद को बचाने में जुटी पुलिस ने सोमवार की रात शिविर के सीसीटीवी रिकार्ड पर भी जबरन कब्जा कर लिया।


दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिनशर लॉ एंड ऑर्डर की बात को सही माने तो बाबा रामदेव की जान को खतरा था। इसी के तहत शनिवार की सुबह ही उन्हें कड़ी सुरक्षा वाली जेडप्लस सुरक्षा देने का दावा दी गई थी। इसके तहत आठ नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के कंमाडो का एक सुरक्षा घेरा बाबा को मुहैया कराया जाता। लेकिन यह सुरक्षा बाबा को मुहैया कराई नहीं गई। अगर पुलिस या सरकार की नीयत साफ होती है तो यह सुरक्षा बाबा को मिल गई होती। जिस तरह से इतनी भारी भीड़ में बाबा के साथ जबरदस्ती हुई, क्या ऐसे में कोई उन पर हमला नहीं कर सकता था।

पुलिस ने शिविर में आने वाले समर्थकों की सघन तलाशी के लिए एक्सरे मशीन लगाई थी। इसमें हर बैग स्कैन होकर शिविर में गया। लेकिन पुलिस का दावा है कि बाबा के समर्थकों ने पुलिस पर पत्थर बरसाए। अब सवाल यह है कि इतनी कड़ी सुरक्षा व एक्सरे स्कैनर के बाद भी पत्थर शिविर में कैसे पहुंच गए। क्या यह पुलिस की विफलता नहीं है।

पुलिस का दावा है कि कोई लाठीचार्ज नहीं किया गया। लेकिन नईदुनिया के पास ही ऐसे फोटो है, जो साफ दर्शाते है कि लाठीचार्ज हुआ है। लोगों का भी आरोप है कि इसी लाठीचार्ज में उनके हाथ-पैर टूटे है। पुलिस का कहना है कि मंच से गिरने से लोगों के हाथ पैर-टूटे।


पुलिस की नीयत इससे भी पता लग जाती है कि सोमवार की रात पुलिस ने बाबा की ओर से शिविर में लगाए सीसीटीवी के रिकार्ड पर भी जबरन कब्जा कर लिया। मालवीय नगर थाने की पुलिस टीम ने सावित्री नगर स्थित सीसीटीवी लगाने वाली कंपनी के दफ्तर पर धावा बोल दिया। भारत स्वाभिमान न्यास के दिल्ली प्रदेश के संगठन मंत्री अनुज सोम का आरोप था कि वह लोग पुलिस की रिकार्ड देने को तैयार थे, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। पूरी रिकार्ड मशीन को ही पुलिस उठाकर ले गई। अब पुलिसिया अत्याचार का पता शायद ही लग पाए। न्यास के इस रिकार्ड को जबरन ले जाने के पीछे पुलिस का क्या उद्देश्य है। क्या पुलिस अपनी बर्बरता को छुपाना चाहती है।

पुलिस के इस पूरे ऑपरेशन के दौरान शिविर की बिजली भी काट दी गई। बिजली काटने के पीछे क्या उद्देश्य था। कहीं बिजली काटने के बाद ही तो लाठीचार्ज नहीं किया गया ताकि मीडिया इसकी सही कवरेज न कर पाए।

इसमें एक अहम सवाल यह भी है कि बकौल पुलिस बाबा को पांच हजार लोगों के लिए शिविर लगाने की अनुमति मिली थी। लेकिन शिविर लगाया गया था करीब एक लाख लोगों के लिए। इतना बड़ा तामझाम पुलिस को नजर नहीं आया। ऐसे में पुलिस का खुफिया विभाग कहां सोया हुआ था। कैसे उन्हें इस बात की भनक नहीं लगी कि इतना बड़ा आंदोलन होने वाला है
सौजन्य से - नईदुनिया

दिल्ली पुलिस की असलियत अब सामने आई...किसी को नहीं पता कहां हैं बालकृष्ण..कालाधन वापस लाने के लिए आइटी को मिले 30 लाख पत्र.





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दिल्ली पुलिस की असलियत अब सामने आई
Jun 07, 01:35 am

नई दिल्ली। हमेशा बाबा रामदेव के साथ नजर आने वाले आचार्य बालकृष्ण का पिछले दो दिनों से कोई पता नहीं है। बाबा रामदेव का कहना है कि रामलीला मैदान से गायब हुए अधिकांश लोग दिल्ली पुलिस के कब्जे में हैं।

आचार्य बालकृष्ण, रामदेव के सबसे निकटस्थ माने जाते हैं। शनिवार को पुलिसिया कार्रवाई से पहले वह दिल्ली के रामलीला मैदान में रामदेव के करीब ही दिखाई दिए थे। आचार्य बालकृष्ण की गैर मौजूदगी के बारे में सोमवार को जब रामदेव से पूछा गया तो उन्होंने सीधा जवाब देने के बजाय कहा, 'रामलीला मैदान से गायब हुए अधिकांश लोग दिल्ली पुलिस के कब्जे में हैं।' गौरतलब है कि एक दिन पहले उंन्होंने बालकृष्ण से बातचीत होने और उनके किसी गोपनीय मिशन पर लगे होने की बात कही थी। इस बाबत जब दिल्ली के पुलिस आयुक्त बी.के. गुप्ता से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बालकृष्ण को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में नहीं लिया है।


दिखाई बाबा के समर्थकों की गिरफ्तारी


नई दिल्ली [जागरण संवाददाता। बाबा रामदेव के सत्याग्रह को कुचलने के लिए बर्बरतापूर्ण कार्रवाई करने वाली दिल्ली पुलिस की एक और असलियत सामने आई है। पुलिस ने रामलीला मैदान से शनिवार रात बाबा के दस समर्थकों को हिरासत में लिया था, लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं दिखाई गई थी। सोमवार को पुलिस ने सभी को गुपचुप तरीके से अदालत में पेश कर दिया।

घटना के बाद से ही बाबा रामदेव के समर्थकों के गायब होने की बात कही जा रही थी। उधर, पुलिस अधिकारी गिरफ्तारी से साफ इनकार कर रहे थे, लेकिन सोमवार को पुलिस ने बाबा के दस समर्थकों को तीस हजारी कोर्ट में पेश किया। सभी पर दंगा भड़काने, सरकारी कर्मचारियों से मारपीट व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस द्वारा गिरफ्तार लोगों में रवि नौटियाल, रोने ओनाम [असम], अजीरथ [राजस्थान], राम नरेश [मध्य प्रदेश], सुरेंद्र, सर्वजीत, प्रेम, योगेंद्र, हरिओम [हरियाणा] व अमन [दिल्ली] शामिल हैं।

पुलिस की पिटाई से घायल हुए लोगों को बाबा रामदेव के समर्थक हरिद्वार लेकर चले गए हैं। कोमा की हालत में राजबाला नामक महिला अभी जीबी पंत अस्पताल के आइसीयू में भर्ती है। रामलीला मैदान में छूट गया सामान भी लोगों को नहीं मिल रहा है। सामान पाने के लिए लोग भटक रहे हैं। पांच लोगों ने कमला मार्केट थाने में सामान नहीं मिलने की शिकायत की है।
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कालाधन वापस लाने के लिए आइटी को मिले 30 लाख पत्र
Jun 07, 08:07 am
बताएं

नई दिल्ली। बाबा रामदेव के आंदोलन से जारी हंगामे के बीच आयकर विभाग में पत्रों की बाढ़ आ गई है। अब तीस लाख से अधिक हस्ताक्षर युक्त पत्र मिल चुके हैं। इन पत्रों में देश के बाहर छुपाकर रखे गए कालाधन को वापस लाने की मांग की गई है। आयकर विभाग इन पत्रों की उपयोगिता की जांच करने में लगा है।

बाबा रामदेव द्वारा पहले भेजे गए इन पत्रों के बड़े-बडे़ पैकेट अब राजस्व सचिव के कार्यालय से आयकर विभाग की खुफिया इकाई को भेजे गए हैं। हालांकि विभाग को या केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के नार्थ ब्लॉक कार्यालय को ऐसे पत्रों का मिलना अब भी बंद नहीं हुआ है।

आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन पत्रों का कोई उपयोग नहीं है क्योंकि इनमें कार्रवाई करने के लायक कोई सूचना नहीं है। कुछ पत्रों में काले धन के मुद्दे पर बाबा रामदेव के आंदोलन को लेकर को लेकर उनका आभार जताया गया है। अधिकांश पत्रों पर भेजने वाले का नाम और पता दर्ज है। जबकि कुछ में कुछ लोगों ने अकूत संपत्ति कहां से अर्जित की इसकी जानकारी होने का दावा किया गया है। अधिकारी ने बताया कि जिन पत्रों के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है उनकी सूचनाओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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बाबा के समर्थन में आठ को कार्य बहिष्कार करेंगे वकील
Jun 06, 11:53 pm


नई दिल्ली। दिल्ली की विभिन्न निचली अदालतों में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों ने समाज में भ्रष्टाचार तथा रामलीला मैदान से हटाने के लिए बाबा रामदेव के खिलाफ पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई के खिलाफ आठ जून को कार्य बहिष्कार करने का सोमवार को निर्णय लिया।

दिल्ली के बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति के प्रवक्ता राजीव खोसला ने कहा कि बार महसूस करते हैं कि सरकार की ऐसी बर्बर कार्रवाई दुनिया के किसी भी लोकतात्रिक देश में सुनने को नहीं मिली। ऐसा जान पड़ता है कि पुलिस सभ्य समाज और अपराधियों के बीच अंतर भूल गई थी।

पटियाला हाऊस कोर्ट, तीस हजारी कोर्ट, द्वारका कोर्ट तथा रोहिणी कोर्ट के बार एसोसिएशनों ने आठ मई को कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

दिल्ली बार एसोसिएशन के महासचिव संजीव नास्सियर ने कहा कि बल प्रयोग से शातिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हटाना बिल्कुल गलत है।

Monday, June 6, 2011

विदेशी मीडिया में भी छा गए बाबा रामदेव.....हम सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देते हैं: बाबा रामदेव.. प्रधानमंत्री ने नहीं निभाया राष्ट्र धर्म: बाबा रामदेव..





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विदेशी मीडिया में भी छा गए बाबा रामदेव

नई दिल्ली, सोमवार, 6 जून 2011( 15:07 IST )

भ्रष्टाचार और विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन के खिलाफ अपने आंदोलन और उससे जुड़ी घटनाओं से देश के अखबारों की सुखिर्यों में छाए बाबा रामदेव को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी जगह मिल रही है। विदेशों के कई अखबारों ने बाबा के आंदोलन और उस पर हुई पुलिस कार्रवाई के सामाचारों को प्रमुखता दी है।

कई अखबारों ने इस कार्रवाई पर तीखी कलम चलाई है।

ऑस्ट्रेलिया के अखबार ‘द एज’ लिखता है, ‘बाबा रामदेव और उनके हजारों अनुयायियों के सामूहिक अनशन को कुचलने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। पुलिस का दावा है कि बाबा के पास सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध की अनुमति नहीं थी।

अखबार ने लिखा कि बाबा के आंदोलन को हिंसक तौर पर खत्म कर दिया गया, लेकिन ऐसा लगता है कि उससे पहले ‘करिश्माई गुरु’ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए सरकार से समझौता करने में सफल हुए थे। इस खबर के मुताबिक रामदेव ने काले धन के मुद्दे और भ्रष्टाचार के घोटालों के आरोपों से घिरी सरकार के खिलाफ जो आंदोलन शुरू किया, उसमें 40,000 से भी ज्यादा लोग उनका साथ दे रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की कार्रवाई ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे बाबा रामदेव के हजारों अनुयायियों को वहां से हटा दिया, पर इस पूरी कार्रवाई पर सिसकते हुए, लेकिन विद्रोही से दिख रहे बाबा रामदेव ने प्रतिबद्धता जताई कि वह इससे विचलित नहीं होंगे। उन्होंने एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बवाल में बदलने के लिए सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराया।

अखबार ने लिखा है कि रामदेव ने इस कार्रवाई के कुछ घंटों बाद ही टीवी पर कहा कि सरकार मुझे मारना चाहती है। मेरी भूख हड़ताल खत्म नहीं हुई है। यह जारी रहेगी। मेरा आंदोलन जारी रहेगा। अमेरिकी अखबार ‘बोस्टन ग्लोब’ ने भी बाबा रामदेव के अनशन के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को जगह दी है।

अखबार लिखता है कि भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने हजारों अनुयायियों के साथ प्रदर्शन कर रहे एक योग गुरु ने कहा है कि राजधानी से निकाले जाने के बाद भी वह अपने प्रदेश में अपना अनशन जारी रखेंगे।

इस खबर के मुताबिक बाबा रामदेव और उनके हजारों समर्थकों ने शनिवार को राजधानी में अनशन शुरू किया था। पुलिस का कहना है कि लगभग 5,000 लोगों के शामिल होने के लिए अनुमति प्राप्त समारोह में 40,000 से ज्यादा लोगों के आने के कारण पुलिस को बल प्रयोग के लिए बाध्य होना पड़ा।

अखबार में कहा गया है कि रामदेव ने इस अभियान को ‘लोकतंत्र पर धब्बा और खुद को मारने की साजिश’ बताया है। उन्होंने आगे भी अपना अनशन जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। (भाषा)


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हम सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देते हैं: बाबा रामदेव
प्रधानमंत्री ने नहीं निभाया राष्ट्र धर्म: बाबा रामदेव


हरिद्वार, सोमवार, 6 जून 2011( 12:46 IST )
बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान पर हुई पुलिस कार्रवाई पर स्वत: संज्ञान लेकर केंद्र को नोटिस जारी करने के लिए आज उच्चतम न्यायालय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वह दिल्ली में अपने अनशन स्थल पर हुई पुलिस की बर्बरता के खिलाफ मानवाधिकार और महिला आयोग में भी शिकायत करेंगे।

रामदेव ने यहां स्थित अपने पतंजलि योगपीठ परिसर में आज सुबह से ‘सत्याग्रह’ दोबारा शुरू करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि रामलीला मैदान पर मेरे और मेरे समर्थकों पर हुई कार्रवाई पर उच्चतम न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र, दिल्ली प्रशासन और दिल्ली के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है। हम न्यायालय और प्रधान न्यायाधीश के शुक्रगुजार हैं।

उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान पर पुलिस ने महिलाओं और बच्चों पर बर्बर कार्रवाई की। इसे देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग को भी स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। हम इन दोनों आयोगों में भी शिकायत करेंगे।

योग गुरु ने कहा कि ‘उच्चतम न्यायालय के स्वत: संज्ञान लेने की घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समय देश में निराशा और अविश्वास का माहौल है। ऐसे में लोकतंत्र की स्थिरता के लिए जनता का न्याय व्यवस्था में विश्वास बने रहना जरूरी है।

न्यायालय ने रामदेव और उनके समर्थकों को रामलीला मैदान से जबर्दस्ती बाहर कर देने की कार्रवाई पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली के मुख्य सचिव और दिल्ली के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

न्यायालय ने सवाल किया है कि ऐसी क्या परिस्थितियां थीं कि लोगों को आधी रात को बल प्रयोग कर हटाना पड़ा। (भाषा)

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दिग्विजय पर देशद्रोह का मामला दर्ज होगा!


मुजफ्फरपुर, सोमवार, 6 जून 2011( 15:55 IST )
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की एक निचली अदालत ने योग गुरु बाबा रामदेव को ठग कहने पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने के लिए सोमवार को एक परिवाद पत्र को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

अधिवक्ता सुधीर ओझा के परिवाद पत्र को यहां के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) आरसी मालवीय ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। ओझा ने कांग्रेस महासचिव के खिलाफ भादंवि की धारा 154 ए, 153 और 504 के तहत मामला दर्ज करने का आग्रह किया है।

सीजेएम के समक्ष दायर इस परिवाद में सभी धाराएं राजद्रोह, दंगा भड़काने की नीयत से उत्तेजक बयान देने और शांति भंग करने से संबंधित हैं। मालवीय ने इस संबंध में एक गवाह आदित्य कुमार का बयान दर्ज किया। अगली सुनवाई 16 जून को होगी।

ओझा ने अपने परिवाद पत्र में कहा कि सिंह के बयान से योग गुरु के अनुयायियों की भावना को ठेस पहुंची है और इसका उद्देश्य दंगा भड़काकर शांति में खलल डालना था इसलिए सिंह के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। (भाषा)

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बाबा पर कसता सरकारी शिकंजा

सोमवार, 6 जून 2011( 11:40 IST )

बाबा रामदेव और केंद्र सरकार की लड़ाई अब नए मोड़ ले रही है। रात में ताकत के बल पर बाबा व उनके हजारों समर्थकों को रामलीला मैदान से बाहर कर देने के बाद सरकार ने रामदेव पर सीबीआई और आयकर विभाग के जरिए वार करने की तैयारी कर ली है। दोनों एजेंसियों को सरकार ने बाबा की सारी संपत्ति और ट्रस्टों की जांच के लिए फ्री हेंड देने का मन बना लिया है। सरकार की नजर बाबा और उनके सहयोगी से जुडी उन सभी 200 कंपनियों के कार्य और आमदनी पर हैं।

इसमें खासतौर पर पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, दिव्‍य फार्मेसी योग, आरोगय हर्ब्‍स, झारखंड मेगा फूड पार्क, दिव्‍य पैकमैफ, वैदिक अष्‍टभजन ब्रॉडकास्टिंग, डायनामिक बिल्‍डकॉम, पतंजलि बायो रिसर्च इंस्‍टीट्यूट आदि शामिल हैं।

अरबों के कारोबार वाली इन कंपनियों की कमाई को जांच के घेरे में लेकर बाबा और उनके सहयोगियों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। गौरतलब है कि बाबा के करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्‍ण 34 कंपनियों के निदेशक हैं। इसके साथ उनके एक और करीबी सहयोगी मुक्‍तानंद 11 कंपनियों के निदेशक हैं। पतंजलि ट्रस्ट को में आयकर भी छूट मिल रही है। इनकम टैक्‍स विभाग और प्रवर्तन निदेशालय अब इस बात की छानबीन करेगा कि कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई है। साथ ही, यह भी जांच होगी कि रामदेव से जुड़ी कंपनियां प्रॉडक्‍ट तैयार करने में हर नियम का पालन कर रही हैं या नहीं। (एजेंसी)



हरिद्वार, रविवार, 5 जून 2011( 23:28 IST )
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राजधानी रामलीला मैदान में संप्रग सरकार की पुलिस कार्रवाई से आहत योग गुरु बाबा रामदेव ने हरिद्वार के अपने पतंजलि योगपीठ में सोमवार से अपना अनशन जारी रखने एलान किया और कहा कि उन्हें अपने इस इरादे से कोई नहीं हटा सकता है।

बाबा रामदेव ने रविवार को कहा कि दिल्ली के लोग क्रूर हो गए हैं और मुझे वहां अनशन की अनुमति नहीं दे रहे हैं। इसलिए मेरा अनशन कल से यहां योगपीठ के यज्ञशाला में होगा। बाबा ने कहा कि हमें अपने इरादे से कोई नहीं हटा सकता है। पूरा देश सरकार की कार्रवाई का जवाब देगा और जो काम पिछले 20 साल में नहीं हुआ था वह अब अगले दो साल में होगा।

अपने प्रमुख सहयोगी आचार्य बालकृष्ण पर लगे रहे आरोपों पर रामदेव ने कहा कि कुछ लोग सुनी सुनाई बातों के आधार पर किसी व्यक्ति के चरित्र पर अंगुली उठाते हैं, जिसको मैं अनुचित मानता हूं।

रामदेव ने दावा किया कि आचार्य बालकृष्ण जो भी कर रहे हैं वह व्यक्तिगत नहीं है और वह सब ट्रस्ट का हिस्सा है। जो काम ट्रस्ट के जरिए नहीं किया जा सकता है, उसके लिए कंपनियों को बनाया गया है। उनके हरेक काम में 100 प्रतिशत की पारदर्शिता बरती जा रही है, जिसकी दुनिया के किसी भी एजेंसी से जांच कराई जा सकती है।

उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती द्वारा समर्थन नहीं दिए जाने के सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि मायावतीजी ने सारे देश के सामने इस कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विकास की बजाय बाबा के विनाश के लिए काम कर रही है। बाबा रामदेव ने एक बार फिर दोहराया कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के साथ वे कभी नहीं बैठेंगे। (भाषा)

पतंजलि योगपीठ में अनशन पर बैठे बाबा रामदेव.....







पतंजलि योगपीठ में अनशन पर बैठे बाबा रामदेव
Jun 06, 08:31 am


हरिद्वार। नई दिल्ली से जबरन रूखसत किए गए बाबा रामदेव ने यहा अपने आश्रम में अपना अनशन फिर से शुरू कर दिया है और उनका कहना है कि जब तक भ्रष्टाचार खत्म करने और काले धन को वापस लाने की उनकी माग केंद्र सरकार नहीं मान लेती, तब तक उनका 'सत्याग्रह' जारी रहेगा।

पतंजलि योगपीठ सूत्रों ने आज यहा बताया कि बाबा रामदेव अपने समर्थकों और अनुयायियों के साथ कल देर रात योगपीठ की यज्ञशाला में सत्याग्रह पर बैठे।

योग गुरु बाबा रामदेव प्रकरण ने रविवार को कई करवटें बदलीं। बाबा को दिल्ली से विशेष विमान के जरिए देहरादून ले जाकर छोड़ा जाना। वहां से हरिद्वार कूच। हरिद्वार से नोएडा के लिए रवानगी और उत्तार प्रदेश की सीमा में प्रवेश पर पाबंदी। मुजफ्फरनगर के पुरकाजी से वापसी। अंतत: बाबा रामदेव रात नौ बजे हरिद्वार स्थित अपने पतंजलि योगपीठ में ही अनशन पर बैठ गए। पुलिस कार्रवाई के विरोध में योग पीठ ट्रस्ट ने सोमवार शाम तक काला दिवस मनाने का एलान किया है।

तो कांग्रेस-सोनिया जिम्मेदार

बाबा रामदेव सुबह करीब सवा ग्यारह बजे पतंजलि योगपीठ पहुंचे। बदहवासी जैसे हालात के बीच आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बाबा रामदेव ने सीधे सोनिया गांधी को अपने निशाने पर लिया। आरोप लगाया कि रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाने वाली सोनिया को भारत और भारतीयों से प्यार नहीं है। बाबा ने कहा कि उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है, अगर उन्हें कुछ होता है तो सोनिया गांधी और कांग्रेस इसके लिए सीधे जिम्मेदार होंगी। आरोप लगाया कि सोनिया के इशारे पर उनके एनकाउंटर की साजिश रची गई थी।

लोकतंत्र की हत्या

बाबा ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि सरकार इस तरह अत्याचार पर उतर सकती है। रात को पुलिस ने जिस तरह एक लाख निहत्थे लोगों पर हमला किया उसकी याद कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। रामदेव ने कहा कि रामलीला मैदान पर लोकतंत्र की हत्या की गई। इससे आपातकाल की याद ताजा हो गई। अगर वह समर्थकों को नहीं रोकते तो जलियांवाला बाग कांड केंद्र सरकार दोहरा देती।


जबरन लिखवाया पत्र


केंद्र सरकार को दिए पत्र पर सफाई देते हुए बाबा ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण पर दबाव डालकर जबरन यह पत्र लिखवाया गया। अगर बालकृष्ण यह पत्र नहीं देते, तो सरकार तीन जून को ही महिलाओं और बच्चों पर बर्बरतापूर्वक कार्रवाई कर देती। बाबा रामदेव ने दोहराया कि कालेधन, भ्रष्टाचार व लोकपाल पर केंद्र सरकार गंभीर नहीं है। केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से बाबा खासे नाराज हैं। उन्हें कुटिल व्यक्ति करार देते हुए बाबा ने कहा कि वह किसी से डरते नहीं है। मारीशस के रास्ते देश में लगे 50 लाख करोड़ रुपए भी कांग्रेस व उससे जुड़े दलों के लोगों के हैं। यही वजह है कि सरकार ने उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने की कोशिश की।


बैरंग लौटना पड़ा


करीब पौने सात घंटे की गहमागमी के बाद योग गुरु शाम छह बजे फिर से दिल्ली की तरफ निकल पड़े। तब बताया गया कि अब वह दिल्ली के आसपास के शहर से अपना आंदोलन चलाएंगे। बाबा हरिद्वार से निकल तो गए, पर उनके मंसूबों पर उत्तार प्रदेश सरकार ने पानी फेर दिया। उत्तार प्रदेश सीमा पर पुरकाजी के पास मुजफ्फरनगर जिला प्रशासन ने उनके काफिले को रोक दिया। लिहाजा बाबा को वापस लौटना पड़ा।


अब तो हरिद्वार से ही आंदोलन


वापसी में वह कुछ देर के लिए मंगलौर के निकट भवानी शंकर आश्रम में रुके और फिर हरिद्वार के लिए चले। रात नौ बजकर पांच मिनट पर पतंजलि योग पीठ पहुंच कर उन्होंने वहीं अनशन शुरू कर दिया। देर रात अनशन स्थल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए बाबा ने अपनी योजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनका नोएडा से आंदोलन चलाने का इरादा था, लेकिन उन्हें मुजफ्फरनगर प्रशासन ने जाने से रोक दिया। इसके चलते फिलहाल हरिद्वार से ही आंदोलन चलाने का निर्णय किया गया है। क्रमबद्ध ढंग से योगपीठ की यज्ञशाला में अनशन किया जाएगा। बाबा ने कहा कि इस मुद्दे पर वह मायावती से भी बात करेंगे। कांग्रेस सरकार की दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। प्रधानमंत्री का नाम लिए बगैर बाबा ने आरोप लगाया कि सत्ता में शीर्ष पर बैठे लोग अपने दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं कर रहे हैं।

रामदेव से मिलने पहुंचे एनडी तिवारी

-वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नारायण दत्ता तिवारी पार्टी लाइन से इतर रविवार को बाबा रामदेव के साथ खड़े नजर आए। वह बाबा से मिलने देर शाम पतंजलि योगपीठ पहुंचे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खात्मे और कालेधन की वापसी की बाबा की मांग ठीक है और वह उनके साथ हैं।

रविवार को एनडी तिवारी के बाबा रामदेव से मिलने पतंजलि योगपीठ आने की चर्चा जोरों पर रही, लेकिन दोपहर तक वह नहीं आए। शाम को जब बाबा पतंजलि से दिल्ली के रास्ते पर चले और मीडिया वहां से हट गया तो तिवारी पतंजलि योगपीठ पहुंच गए और बाबा के सहयोगियों से मुलाकात की। इस बीच बाबा रामदेव के उत्तार प्रदेश सीमा पर रोके जाने के बाद वापस पतंजलि आने की खबर आई। मीडिया के लोग फिर पतंजलि योगपीठ पहुंचे। बाबा तब तक नहीं पहुंचे थे, लेकिन वहां से निकलते हुए एनडी तिवारी उन्हें मिल गए। उनसे जब वहां आने का प्रायोजन पूछा गया तो उन्होंने बाबा रामदेव से मिलने आने की बात कही। उनसे जब यह सवाल किया गया कि वह पार्टी लाइन से इतर बाबा के साथ हैं, तो उनका जवाब था कि कांग्रेस बाबा का विरोध नहीं कर रही है। वह कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव के आंदोलन को ठीक मानते हैं और इस मुद्दे पर उनके साथ हैं।

भगदड़ में जा सकती थी सैकड़ों की जान

-रामलीला मैदान में पुलिस शनिवार की आधी रात के बाद उस समय पंडाल में पहुंची जब बाबा समेत उनके सभी समर्थक व मीडियाकर्मी गहरी नींद में सो रहे थे। अचानक हजारों पुलिसकर्मियों की एक साथ कार्रवाई से पंडाल में अफरा-तफरी मच गई। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी इधर-उधर भागने लगे। शुक्र है कि किसी की जान नहीं गई, नहीं तो जिस तरह कार्रवाई की गई, उससे भगदड़ में सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी।

पुलिस से सबसे बड़ी चूक यह हुई कि उसने पंडाल में बने तीन आपातकालीन गेट नहीं खोले। हमदर्द चौराहे की तरफ वाले केवल एक गेट को ही खुला रहने दिया गया। पुलिस कार्रवाई के समय पंडाल में 60 हजार लोग थे। भगदड़ मची तो सभी एक-दूसरे को धक्का देते, गिरते-पड़ते भागने लगे। जो गिर गया, कुचला गया। पुलिस के डंडे व कुचले जाने से सैकड़ों लोग बेहोश हो गए। जब भीड़ कम हुई तब पुलिस ने कुछ लोगों को वहां से उठाकर पास के अस्पताल में पहुंचाया और कुछ को वहीं छोड़ दिया। पंडाल में हर तरफ चप्पल, जूते व सामान बिखरे पड़े थे। नजारा साफ बयां कर रहा था कि कानून के रखवालों ने ही कानून की किस कदर धज्जियां उड़ाई हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि आसू गैस के गोले खाली मैदान व सड़कों पर छोड़े जाते हैं, चहारदीवारी के बीच बंद पंडाल में इस तरह की कार्रवाई गलत है।


भड़क सकती थी आंसू गैस के गोले से लगी आग


-रामलीला मैदान के बंद पंडाल में शनिवार रात आंसू गैस के गोले छोड़ने से पंडाल में आग लग गई थी। यह आग भड़क भी सकती थी। आसू गैस व खुद को हजारों पुलिसकर्मियों से घिरा देख लोग डर गए। लोगों को डर था कि पुलिस उन पर गोली न चला दे। पंडाल में डर व दम घुटने के कारण सैकड़ों लोग बेहोश हो गए। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का भी यही मानना है। सवाल यह है कि आग अगर पूरे पंडाल में फैल जाती तब क्या होता। तब इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार होता? इन सवालों पर कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।