Monday, June 6, 2011

क्यों छिड़ी रामलीला मैदान पर 'महाभारत.......रामदेव के खिलाफ कार्रवाई पर अमेरिकी भारतीय छात्र भड़के...










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क्यों छिड़ी रामलीला मैदान पर 'महाभारत'....

सोमवार, 6 जून 2011( 13:49 IST )

जब बाबा रामदेव द्वारा भष्टाचार के विरोध व कालेधन को भारत लाने का आंदोलन थोड़ा शांत होने लगा था तब एकाएक दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्रालय के आदेश पर अमल करते हुए रात 1.15 मिनट पर रामलीला मैदान में 'महाभारत' छेड़ दी। दिनभर की जद्दोजहद के बाद गहरी नींद में सोए हजारों लोगों को संभलने का मौका दिए बिना पुलिस ने उन्हें रामलीला मैदान खाली करने का आदेश दे दिया। इसके बाद कई घंटो तक मची अफरा-तफरी में पथराव, लाठियां और आंसूगैस के गोले तक चले और कई लोग घायल हुए।

आखिर क्यों हुअ एक्शन : पर इस पूरे घटनाक्रम से जो बातें बाहर आई है उनके मुताबिक बाबा के खिलाफ हुआ यह एक्शन एकाएक नहीं था बल्कि इसकी पूरी तैयारी पहले से ही कर ली गई थी। अगर नहीं तो पुलिस और रेपिड एक्शन फोर्स के 5000 जवान इतने शॉर्ट नोटिस पर इतने बड़े एक्शन के लिए आखिर कैसे तैयार थे।

दरअसल खुफिया एजेंसियों ने सरकार को पहले ही चेता दिया था कि जिस रामलीला ग्राउंड में 5000 लोगों के लिए योग शिविर आयोजित करने की इजाजत है वहां 30-50 हजार लोग जुटने वाले हैं।

बाबा की जान को खतरा : इतनी भीड़ को संभालने के लिए रामलीला मैदान व आस-पास के इलाके में इंतजाम करना बेहद मुश्किल होगा। इसके बाद खुफिया एजेंसियों ने बाबा रामदेव को जान का खतरा होने की रिपोर्ट देते हुए सरकार को अलर्ट किया कि अप्रिय स्थिति में इतनी भीड़ को संभालना मुश्किल होगा और इससे पूरी दिल्ली पर असर पड़ सकता है।

हर दिन हजारों लोगों की आमद होते देख पुलिस-प्रशासन ने रामलीला मैदान पर इस आंदोलन की इजाजत रद्द करने और बात न मानने की स्थिति में पुलिस कार्रवाई की तैयारी कर ली थी।


मनाने की कवायद :
इस बीच केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने बाबा और उनके सहयोगियों से बातचीत कर मामला सुलझाने की कोशिश करना जारी रखी। कई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रामदेव और सरकार के बीच कुछ मामलों पर सहमति भी बन गई थी जिसका खुलासा रामदेव ने प्रेस कांफ्रेंस में भी किया था। लुछ सूत्रों के मुताबिक रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने एक समझौता पत्र भी कपिल सिब्ब्ल को सौंपा था। जिसमें आंदोलन को एक-दो दिन में खत्म करने की बात कही गई थी।


हाई टेंशन ड्रामा :
पर स्थिति में नाटकीय बदलाव तब आया जब 4 जून की रात लगभग 11.15 बजे रामलीला मैदान में मौजूद केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों कपिल सिब्‍बल और सुबोध कांत सहाय को फोन पर सूचना मिली कि बाबा रामदेव व उनके सहयोगी तय समझौते को न मानते हुए अनशन को जारी रखेंगे। रामदेव और उनके सहयोगियों की इस वादाखिलाफी की सूचना की पुष्टि होते ही सिब्बल और सहाय ने गृह मंत्रालय से बातचीत की जिसके बाद दिल्‍ली पुलिस को रामलीला मैदान में 'एक्शन' के लिए हरी झंडी मिल गई।

क्या बाबा ने दिया धोखा! आचार्य बालकृष्ण के इस पत्र के बारे में बाबा के एक निकट सहयोगी ने कहा कि समझौता पत्र सोची-समझी एक सोची समझी रणनीति का हिस्‍सा था, क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया जाता तो सरकार अनशन शुरु ही नहीं होने देती। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पत्र का मतलब यह नहीं था कि रामदेव सरकार के आगे झुक गए हैं।


पर गलती किसी भी रही हो
, अब सरकार पर इस कार्यवाई का दांव उलटा पड़ता दिख रहा है। सुप्त पड़े राजनीतिक दल तो इस मौके को भुनाने में लगे ही हैं, सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र से इस मामले पर जवाब तलब कर लिया है।

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रामदेव के खिलाफ कार्रवाई पर अमेरिकी भारतीय छात्र भड़के

वॉशिंगटन, सोमवार, 6 जून 2011( 12:25 IST )
अमेरिका में अध्ययन कर रहे भारतीय छात्रों ने योग गुरु बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के खिलाफ नई दिल्ली में की गई पुलिस कार्रवाई की निंदा की है और कहा है कि ऐसा करके सरकार ने सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार और जनता का विश्वास खो दिया है।

छात्रों ने इस बाबत भारत के राष्ट्रपति को लिखा एक ज्ञापन भारतीय दूतावास को सौंपा जिसमें कहा गया है कि छात्र और भारत के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हम भारत सरकार की ओर से की गई इस कार्रवाई की स्पष्ट तौर से निंदा करते हैं।

ज्ञापन पर मेरीलैंड विश्वविद्यालय (यूएमडी) में अध्ययनरत भारतीय छात्रों ने हस्ताक्षर किए। तीन संगठनों इंडियन स्टूडेंट ग्रुप (यूएमडी), कॉलेज पार्क डीईएसआई और स्टूडेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी छात्रों का प्रतिनिधित्व किया।

ज्ञापन में कहा गया है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में नाकाम रहने और अपने नागरिकों को संवैधानिक अधिकार से वंचित करने के चलते, हमारा मानना है कि सरकार सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार और जनता का विश्वास खो चुकी है। ऐसे में इस सरकार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर देना चाहिए।

अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की ओर से भारतीय दूतावास को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि आधी रात के बाद पुलिस की 70 हजार से अधिक निर्दोष लोगों को खदेड़ने की कार्रवाई आपातकाल के उस काले अध्याय की याद दिलाती है जो हमने अब तक किताबों में ही पढ़ा है।

छात्रों ने कहा कि चारों ओर से घिरे हुए परिसर में पुलिस की कार्रवाई से भगदड़ मच सकती थी और कई निर्दोष लोगों की जान भी जा सकती थी।

ज्ञापन में कहा गया है ‘निहत्थे लोगों में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्गों सहित सभी आयु वर्ग के लोग थे जिन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज किया गया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर सरकार की ओर से किया गया बल प्रयोग कुछ लोगों द्वारा अपना पक्ष रखने के लिए हिंसा के प्रयोग को जायज ठहराने जैसा प्रतीत होता है।

मेरीलैंड विश्वविद्यालय के शोध छात्र आशुतोष गुप्ता ने प्रश्न किया कि अगर जनता शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं कर सकती तो लोकतंत्र में जनता और क्या कर सकती है? जिस तरीके से, सरकार ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर कार्रवाई की है वह स्वीकार्य नहीं है। (भाषा)

गांधी जी होते तो ऐसा अत्याचार देख रो पड़ते,.............पूरा करना है बापू का सपना




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गांधी जी होते तो ऐसा अत्याचार देख रो पड़ते
Jun 06, 12:59 pm

हरिद्वार। भ्रष्टाचार और कालेधन के मुद्दे को लेकर हरिद्वार के पतंजलि योग पीठ में अनशन पर बैठे बाबा रामदेव ने सोमवार को एक बार फिर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। पुलिस की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई से आहत बाबा रामदेव ने कहा कि अगर गांधी जी आज जिंदा होते तो वह भी इस तरह का अमानवीय अत्याचार देखकर रो पड़ते।

हरिद्वार में बाबा रामदेव ने कहा, 'रामलीला मैदान में पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अब वहां से भी लोगों को जबरन निकाला जा रहा है ताकि मुकदमा दर्ज न हो सके। गम्भीर रूप से घायल लोग अभी अस्पतालों में मौजूद है।'

रामदेव ने कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मेरा समर्थन करने वाले सभी राजनीतिक, अध्यात्मिक और समाजसेवी संगठनों का मैं आभार व्यक्त करता हूं। पूरे देश में करोड़ों लोग इस घटना से इस कदर आहत है कि उन्होंने अपना शोक प्रकट करने के लिए व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बाजार स्वयं ही बंद कर दिए है। देशभर में लोग विभिन्न तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे है।

एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इस घटना के बाद भी काफी निराशाजनक बयान दे रही है। खबर का हवाला देते हुए रामदेव ने कहा कि सरकार कह रही है कि जैसा रामदेव के साथ किया गया वैसा ही अन्य लोगों के साथ भी किया जाएगा।
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पूरा करना है बापू का सपना
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नई दिल्ली, शनिवार, 4 जून 2011( 18:01 IST )
बाबा रामदेव ने कहा कि वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और शहीद भगतसिंह के उन सपनों को पूरा करना चाहते हैं जो उन्होंने भारत के लिए देखा था।

आज से शुरू हुए अपने अनशन के दौरान रामदेव ने भारी तादाद में मौजूद अपने समर्थकों से कहा कि हमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और शहीद-ए-आजम भगतसिंह के उन सपनों को पूरा करना है, जो उन्होंने भारत के लिए देखा था।

अनशन स्थल के मंच पर मौजूद कुछ लोगों द्वारा उन्हें ‘महापुरुष’ बताए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदेव ने कहा कि मैं महापुरुष नहीं हूं और न ही ऐसा बनने की कोशिश कर रहा हूं।

इस देश के महापुरुष महात्मा गांधी, भगत सिंह और स्वामी विवेकानंद जैसे लोग हैं। मैं महापुरुषों के आगे नहीं, बल्कि उनके पीछे उनके बताए रास्तों पर चलना चाहता हूं।

मंच पर मौजूद दो कवियों ने जब अपनी कविताओं के जरिए कांग्रेस महासचिव दिग्विजयसिंह पर निशाना साधना चाहा तो रामदेव ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने दोहराया कि वह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं हैं।

गलत किया मगर आदेश मानना मजबूरी..............




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गलत किया मगर आदेश मानना मजबूरी
Jun 06, 01:19 am

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। शनिवार की रात रामलीला मैदान में जिन लोगों ने दिल्ली पुलिस का चेहरा देखा, उनके रोंगटे खड़े हो गए। चारों ओर पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की जा रही है। लोगों का कहना है कि आजादी के बाद देश की राजधानी में जलियावाला बाग कांड जैसी घटना को दोबारा देखा गया। हालांकि इस कांड पर दिल्ली पुलिस के कई डीसीपी व एसीपी समेत अन्य आला अधिकारियों का इस घटना पर कहना था कि वे तो सिर्फ सरकार के आदेश का पालन कर रहे हैं।

दबी जुबान में पुलिस अफसरों ने कहा कि वे अच्छी तरह समझ रहे हैं कि उनसे गलत कराया जा रहा है, लेकिन मजबूरी में उन्हें कार्रवाई करनी पड़ रही है।

पुलिस की दलीलों से साफ पता चल रहा था कि पूर्ण नियोजित व राजनीतिक दबाव में बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की गई। किंतु इस मसले पर पुलिस मुख्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान स्पेशल सीपी लॉ एंड ऑर्डर धर्मेद्र कुमार से जब राजनीतिक दबाव की बात पूछी गई तो उन्होंने ऐसा कुछ होने से इंकार कर दिया।

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रामदेव मामले पर संतों ने केंद्र को कोसा
Jun 05, 08:55 pm
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हरिद्वार [जासं]। दिल्ली में बाबा रामदेव को अनशन से जबरन उठाने और पुलिस के तौर-तरीके को लेकर संत समाज की भृकुटि तनी हुई है। संत समाज ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए केंद्र सरकार को जमकर कोसा। संतों ने एक स्वर में इसे तानाशाही करार दिया।

उनका कहना है कि यह कार्रवाई न तो भारतीय संस्कृति की परंपरा रही है और न ही संविधान की मर्यादा। संतों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई करके केंद्र सरकार ने अपना जन विरोधी चेहरा पेश किया है।

केंद्र को जवाब देना होगा:-

स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज, शंकराचार्य ने कहा कि केंद्र सरकार किस हद तक लोकतंत्र की मर्यादाओं को ताक पर रख सकती है। यह बात साबित हो गई है। षडयंत्र रचकर कार्रवाई को अंजाम दिया गया। केंद्र को जवाब देना होगा कि क्या यही लोकतंत्र की परिभाषा है। देश के विकास की बागडोर संभालने वाले ही जब इस हद तक गिर जाएंगे, तो फिर क्या हक रह जाता है इन्हें सत्ता पर आसीन होने का।

अशोभनीय, दुर्भाग्यपूर्ण:-

स्वामी शिवानंद सरस्वती, परमाध्यक्ष, मातृसदन, हरिद्वार ने कहा कि लोकतंत्र में यह कार्रवाई अशोभनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतांत्रिक देश में आमजन को अपनी बात रखने का अधिकार है। स्वामी रामदेव तो भ्रष्टाचार और कालेधन की वापसी जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। केंद्र सरकार की इस कार्रवाई से समाज में अच्छा संदेश नहीं पहुंचा है। मातृसदन इसकी घोर निंदा करता है।

अलोकतंत्र राज:-

श्री महंत हरिगिरि, मंत्री, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा ने बताया कि इस कार्रवाई से लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलोकतंत्र राज प्रस्तुत किया गया है। तानाशाह बनकर सत्ता का दुरुपयोग हुआ है। केंद्र सरकार ने षडयंत्र रचकर इस घटना को अंजाम दिया है।

गोलीतंत्र का राज:-

स्वामी सत्यमित्रानंद, संस्थापक, भारत माता मंदिर, हरिद्वार ने कहा कि संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी दी गई है। ऐसा तो अंग्रेजों के जमाने में भी नहीं हुआ है। इस कार्रवाई से लगता है कि देश में लोकतंत्र नहीं, बल्कि गोलीतंत्र का राज चल रहा है। केंद्र सरकार ने संविधान की मर्यादा को तोड़ा है। पूरा देश इसकी निंदा कर रहा है

बाबा को नोएडा में अनशन की इजाजत नहीं, पुलिस कार्रवाई से यूपी में भड़के रामदेव समर्थक, हरिद्वार में अनशन करेंगे बाबा रामदेव



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बाबा को नोएडा में अनशन की इजाजत नहीं
Jun 05, 09:09 pm


लखनऊ [जाब्यू]। मायावती सरकार ने बाबा रामदेव को उत्तर प्रदेश की सीमा में अनशन करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। बाबा रामदेव ने राज्य सरकार से नोएडा के सेक्टर 39 में अनशन करने की अनुमति चाही थी। उप्र सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नजरिये से नोएडा या राज्य के किसी भी जिले में अनशन शुरू करने की अनुमति नहीं दी सकती है। सरकार के 'ना' करते ही रविवार की रात बाबा रामदेव ने जैसे ही उत्तराखण्ड राज्य से उप्र की सीमा में मुजफ्फर नगर जिले में प्रवेश किया, उन्हें रोक लिया गया और तुरंत वापस कर दिया गया। बाबा रामदेव ने घोषणा की है, अब वह उत्तराखण्ड राज्य के हरिद्वार में अनशन पर बैठेंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार को दिन में जैसे ही इस बात के संकेत मिलना शुरू हुए कि बाबा रामदेव केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली से सटी उप्र की सीमा में अनशन करना चाहते हैं, बसपा में शीर्ष स्तर पर बाबा को अनुमति देने या ना देने में राजनीतिक नफा-नुकसान का आंकलन शुरू हो गया था। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा भी था कि बाबा की तरफ से अभी कोई लिखित अनुरोध पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। अनुरोध पत्र मिलने पर कोई निर्णय किया जाएगा। देर शाम गौतमबुद्ध नगर के डीएम ने उप्र सरकार को सूचित किया कि बाबा रामदेव नोएडा के सेक्टर 39 में अनशन शुरू करना चाहते हैं, इसके तुरंत बाद गृह विभाग ने बैठक बुलाई, जिसमें अपर कैबिनेट सचिव रवींद्र सिंह ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श किया गया। यही कोई आधे घंटे चली बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि बाबा रामदेव के अनुरोध को खारिज कर दिया गया है।

बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के नोएडा में अनशन शुरू करने से पहले बाबा रामदेव ने हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में अनशन शुरू करने का प्लान तैयार किया था। बाबा रामदेव इसी जिले के रहने वाले हैं। चूंकि हरियाणा में कांग्रेस की सरकार है, इस वजह से वहां भी बाबा राम देव की बात नहीं बन सकी।

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पुलिस कार्रवाई से यूपी में भड़के रामदेव समर्थक
Jun 06, 01:16 am
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विडियो: बाबा रामदेव की गिरफ्तारी के खिलाफ सूबे में उबाल

लखनऊ। योग गुरु बाबा रामदेव की गिरफ्तारी व समर्थकों पर लाठीचार्ज के खिलाफ सूबे में उबाल है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए। सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए यज्ञ और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह , पीएम मनमोहन सिंह के पुतले फूंके गये। भाजपा और उसके अनुषंगिक संगठनों के अलावा समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रमों में हिस्सेदारी की।

लखनऊ में जहां सामाजिक कार्यकर्ताओं में भी आक्रोश दिखा वहीं केंद्र सरकार को सद् बुद्धि देने के लिए बुद्धि-शुद्धि यज्ञ भी किया गया। कार्यकर्ताओं ने सत्याग्रह के समर्थन में अनशन शुरू किया।

भाजपा ने भी बाबा के समर्थन में धरना शुरू कर दिया है। चारबाग स्थित दीनदयाल स्मृतिका पर धरने पर बैठने वालों में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही, राज्यसभा सदस्य कलराज मिश्र, कुसुम राय, टीवी कलाकार स्मृति इरानी समेत अन्य शामिल थे। गोंडा, बहराइच, लखीमपुर, सुल्तानपुर, सीतापुर और श्रावस्ती में भी भाजपा और अन्य हिन्दू संगठनों ने धरना-प्रदर्शन व केंद्र सरकार का पुतला फूंक कर गुस्सा जताया।

मेरठ में सुबह से ही सड़क पर उतरकर लोगों ने रोष जाहिर किया। कलक्ट्रेट पर धरना दिया गया। छात्रों ने जुलूस निकालकर केंद्र सरकार का पुतला फूंका।

मुजफ्फर नगर और बुलंदशहर में भी समर्थकों ने केंद्र सरकार का पुतला फूंका। सहारनपुर में बाबा रामदेव के समर्थकों के साथ व्यापारी संगठन और गैर कांग्रेसी पार्टियों के कार्यकर्ता भी सड़क पर उतर आए। बागपत में जगह-जगह केंद्र सरकार के खिलाफ जुलूस निकाला गया। बिजनौर में पालिका चौक पर जुटे कई संगठनों के सैकड़ों लोगों ने रविवार और सोमवार को काला दिवस के रूप में मनाने का एलान किया।

कानपुर में लोगों ने जगह-जगह धरना देकर पुलिस के इस कदम की निंदा की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पीरोड में केंद्र सरकार का पुतला फूंका और प्रधानमंत्री के विरुद्ध नारेबाजी की।

पतंजलि योग समिति ने शिक्षक पार्क नवीन मार्केट में अनशन कर बाबा के समर्थन में हुंकार भरी। धर्म संघ से जुड़े लोगों और रोडवेज कर्मचारियों ने फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा पर धरना दिया।

चित्रकूट में मंदाकिनी तट पर जुटे साधु-संतों ने बाबा का समर्थन करते हुए कहा कि आधी रात के बाद कार्रवाई कर केंद्र सरकार ने कायरता का परिचय दिया है।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि पूरा देश बाबा रामदेव के साथ खड़ा है। बांदा में आहुति देकर ईश्वर से नेताओं को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।

उरई में दर्जनों लोगों ने सीओ दफ्तर के बगल में काली पट्टी बांधकर धरना दिया। फर्रुखाबाद में भारत स्वाभिमान व पतंजलि योग समिति सोमवार को कलक्ट्रेट में काला दिवस मनायेगी। कन्नौज, रायबरेली में भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद, अधिवक्ताओं के साथ अन्य लोग भी सड़कों पर उतर आये। इटावा में बाबा समर्थकों ने काला दिवस मनाया। उन्नाव में पतंजलि योग समिति के सत्याग्रह स्थल पर पुलिस के कड़े पहरे के बीच कार्यकर्ताओं ने हवन कर केंद्र सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना की।

बरेली में कलक्ट्रेट गेट पर भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का अनशन जारी रहा। पीलीभीत में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए यज्ञ किया। आगरा में शनिवार को शहीद स्मारक पर शुरू हुआ भ्रष्टाचार मिटाओ सत्याग्रह आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। अलीगढ़ में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट एवं पतंजलि योग समिति ने विरोध में रैली निकाली तो भाजपा और संस्कार भारती ब्रज प्रांत की ओर से केंद्र सरकार के पुतले फूंके गए।

आजमगढ़ में रिक्शा स्टैंड पर लोगों ने उपवास रखकर धरना दिया और बाबा के साथ हुई कार्रवाई को सरकार की बर्बरता करार दिया। सरकार की सद्बुद्धि के लिए यज्ञ किया गया। बलिया, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर में धरना देकर इस कार्रवाई की निन्दा की गयी वहीं विद्यार्थी परिषद, भाजपा सहित अन्य संगठनों ने पुतला फूंक कर विरोध जताया। मऊ में भी लोगों में तीखा आक्रोश रहा। यहां पुतला फूंककर विरोध प्रकट किया। मीरजापुर व सोनभद्र में भी प्रधानमंत्री का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया गया।

गोरखपुर में पंतजलि योग समिति एवं भारत स्वाभिमान मंच के कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। भाजपा ने काली पट्टी बांधकर विरोध मार्च निकाला। भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने केन्द्र सरकार का पुतला फूंका। महराजगंज में प्रदर्शन कर काग्रेस विरोधी नारे लगाए गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने बांह में काली पट्टी बांध प्रमुख मार्गों पर प्रदर्शन किया।

कुशीनगर, देवरिया, बस्ती में बाबा की गिरफ्तारी और अनशन पर लाठीचार्ज के विरोध में धरना दिया गया। बाबा रामदेव व समर्थकों पर दमन के खिलाफ जनाक्रोश इलाहाबाद, कौशाम्बी और प्रतापगढ़ में फूट पड़ा। इलाहाबाद में सुबह दस बजे तक कचहरी पर सैकड़ों लोग जमा हो गए। चिलचिलाती धूप में समर्थक बाबा रामदेव के समर्थन में नारेबाजी करते हुए घंटों धरने पर बैठे रहे। भाजपा युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने जंक्शन पर पवन एक्सप्रेस रोककर बाबा पर हुए हमले पर विरोध प्रकट किया। इसके बाद ऐतिहासिक सुभाष चौराहा पर कांग्रेस पार्टी का पुतला फूंका।

कौशाम्बी में भाजपाइयों ने ककोढ़ा व भरवारी कस्बे में सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह व कपिल सिब्बल का पुतला दहन कर अपना आक्रोश जताया। प्रतापगढ़ में चाय-पान की दुकानों से लेकर जहां भी लोग इकट्ठा हुए, यही चर्चा होती रही।

गाजियाबाद में बाबा रामदेव को जबरन उठाने और हरिद्वार भेजने के विरोध में भाजपा कार्यकर्ता रविवार को सड़कों पर उतर आए। उन्होंने पहले केंद्र सरकार का पुतला फूंका फिर गांधी पार्क में धरना दिया। हिंदू मुस्लिम राष्ट्रीय एकता पार्टी ने इस हंगामे को लेकर प्रधानमंत्री से इस्तीफा व पुलिस कमिश्नर को निलंबित करने की मांग की है।

आक्रोश से तमतमाई रामनगरी

अयोध्या। योगगुरु बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के साथ हुए पुलिसिया दु‌र्व्यवहार से रामनगरी आक्रोश से भर उठी है। रामनगरी के प्रमुख मंदिरों व अखाड़ों के संतों ने एक स्वर से केंद्र सरकार की निंदा करते हुए कहा कि संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए। विश्व हिंदू परिषद ने इस मामले को लेकर 6 से 8 जून तक पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन करने की घोषणा की है।

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने कहा कि योगगुरु रामदेव का अपमान पूरे देश के संत समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो इस कार्यवाही के विरोध में वह राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव के वस्त्रों को पुलिस द्वारा उतारा जाना संत वेश व संत परंपरा का उल्लंघन है। इसे पूरे देश के संतों में आक्रोश है। राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि योगगुरु व उनके समर्थकों के साथ हुई बदसलूकी केंद्र सरकार की लोकतंत्र विरोधी नीतियों को उजागर करने वाली है।

दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने इसे केंद्र सरकार की तानाशाही की पराकाष्ठा बताया। राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य व पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार की जननी है, जिसने अपने लोगों को बचाने के लिए यह कार्रवाई की।

अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास ने कहा कि रामदेव का अपमान संत समाज भूल नहीं सकेगा। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद विनय कटियार ने कहा कि यह शर्मनाक कार्रवाई कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इशारे पर की गई है। कांग्रेस के कई बड़े नेताओं का धन विदेशी बैंकों में जमा है। उनके नाम उजागर होने से डर से केंद्र घबरा गई है। बलरामपुर में पत्रकारों से बात करते हुए विधायक व देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत कौशलेन्द्र नाथ ने रामदेव के साथ हुई अभद्रता को लोकतंत्र का अपहरण बताया।




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गांधीवादी कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने एक बार फिर तेवर कड़े,बाबा रामदेव पर हुई कार्रवाई के विरोध में हजारे



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बीते अप्रैल में अनशन कर अपनी मांगें मनवा चुके गांधीवादी कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने एक बार फिर तेवर कड़े कर लिए हैं। बाबा रामदेव पर हुई कार्रवाई के विरोध में हजारे और उनके साथी सोमवार को होने वाली लोकपाल विधेयक मसौदा समिति की बैठक में शामिल नहीं होंगे और हजारे आठ जून को दिल्ली में एक दिन का अनशन भी करेंगे।

लोकपाल विधेयक मसौदा समिति में शामिल हजारे पक्ष ने अब यह भी शर्त रखी है कि वे तभी अगली बैठकों में शिरकत करेंगे, जब उसका सीधा वीडियो प्रसारण किया जाएगा।

हजारे ने कहा कि रामलीला मैदान में मध्यरात्रि को रामदेव और उनके समर्थकों के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ, उसकी हम निंदा करते हैं। कल की घटना लोकशाही और मानवता पर कलंक है। सरकार ने लोकशाही का गला घोंटने का काम किया है। कल रात रामलीला मैदान पर सोते हुए बच्चों और महिलाओं पर लाठीचार्ज करना कोई मानवीय कृत्य नहीं था।

उन्होंने कहा कि लोकपाल मसौदा समिति की बैठकों में भी सरकार बार-बार अपना रुख बदल रही है। वह पहले प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में शामिल करने पर मान गई थी, लेकिन बाद में वह इससे मुकर गई। हजारे ने कहा कि रामदेव पर कार्रवाई और लोकपाल मसौदा समिति की अब तक की बैठकों में दिखे सरकार के रुख के विरोध में हमने कल समिति की बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।

हजारे ने कहा कि हम इस बर्बरता के खिलाफ आठ जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिन का अनशन करेंगे। हम सभी देशवासियों से इस अनशन में शामिल होने की अपील करते हैं। रामदेव के साथ हुई घटना के बाद क्या उन्हें जंतर-मंतर पर अनशन कर पाने का भरोसा है, इस पर गांधीवादी नेता ने कहा कि क्या दिल्ली किसी की जागीर है? जब जान हथेली पर रखकर आंदोलन करो तो डर नहीं लगता।

बहरहाल, हजारे ने कहा कि अगर रामदेव भविष्य में किसी आंदोलन में उनके साथ जुड़ना चाहते हैं तो इससे पहले वह कुछ मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करना चाहेंगे। हजारे ने कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे से निपटने के प्रति सरकार उदासीन है। हम लोकपाल समिति की अब तक की बैठकों में केंद्र के रुख और कल की घटना को सरकार की इसी उदासीनता से जोड़कर देखते हैं। मुझे लगता है कि देश में बीते अप्रैल की तरह एक बार फिर आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है।

उधर, लोकपाल मसौदा समिति के सह-अध्यक्ष शांति भूषण ने कहा कि हम मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री राष्ट्र के समक्ष यह स्पष्ट करें कि ऐसे क्या कारण थे कि उनकी सरकार ने कल रात रामदेव पर इस तरह की पुलिस कार्रवाई के आदेश दिए। कल रात की बर्बर घटना वर्ष 1975 के आपातकाल की याद दिलाती है।

उन्होंने कहा कि हम लोकपाल समिति की अगली बैठकों में तभी शिरकत करेंगे, जब उसका सीधा वीडियो प्रसारण किया जाएगा। अगर सरकार एक मजबूत लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने में हिचकेगी तो हमारे पास फिर जंतर-मंतर जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रह जाएगा।

भूषण ने कहा कि हम विदेशों में जमा कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने की बाबा रामदेव की मांग का समर्थन करते हैं। लोकपाल मसौदा समिति में शामिल सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा कि समिति की बैठकों में सरकार के अब तक के रुख और कल रामदेव के साथ हुई घटना के विरोध में हम कल की बैठक का बहिष्कार कर रहे हैं। हम सरकार को कल एक पत्र लिखेंगे। उस पत्र पर सरकार के जवाब के आधार पर हम अगली बैठकों में शामिल होने के बारे में फैसला करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामदेव से उनके पक्ष के कोई मतभेद नहीं हैं।

गौरतलब है कि लोकपाल मसौदा समिति की 30 मई को हुई बैठक में सरकार और हजारे पक्ष के बीच प्रधानमंत्री और उच्च न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाने को लेकर गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए थे। इसके बाद हजारे पक्ष की ओर से समिति से अलग होने की चेतावनी दी गई थी, जबकि सरकार ने राज्यों और राजनीतिक दलों को लोकपाल से जुड़े छह मुद्दों पर पत्र लिखकर उनकी राय मांगी थी। (भाषा)
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रामदेव पर कार्रवाई से रविशंकर निराश
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बेंगलुरु, रविवार, 5 जून 2011( 20:35 IST )
FILE
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने दिल्ली के रामलीला मैदान में बाबा रामदेव पर कार्रवाई को लेकर रविवार को निराशा जताई और कहा कि वे मध्य रात्रि को ही विदेशी दौरे से स्वदेश वापस लौट रहे हैं।

एक बयान में उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और भ्रष्टाचार एवं काला धन से लड़ने में और कृतसंकल्प रहने को कहा। बयान में कहा गया है कि रविशंकर बीच में ही विदेश का दौरा छोड़ रहे हैं और भारत लौट रहे हैं। (भाषा)

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दोहराया गया 1975 का इतिहास


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दोहराया गया 1975 का इतिहास
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नई दिल्ली, रविवार, 5 जून 2011( 10:18 IST )
प्रभावी लोकपाल विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित संयुक्त समिति के सह अध्यक्ष शांतिभूषण ने कहा है कि रामलीला मैदान पर शनिवार रात वैसा ही हुआ है जैसा सन 1975 में 25 और 26 जून की रात हुआ था जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश पर इमरजेंसी थोपी थी।

शांतिभूषण ने घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र है तथा शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है।

उन्होंने कहा कि वह बाबा रामदेव के समर्थक नहीं हैं लेकिन रामलीला मैदान पर जैसी बर्बरतापूर्ण कार्रवाई हुई उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह और सरकार के मंत्री आज कठघरे में खड़े हैं।

उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान पर पुलिस कार्रवाई से लोगों की आंखें खुल जानी चाहिए कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई कितनी जोखिम भरी है उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार में डूबी सरकार भ्रष्ट लोगों को बचाने के लिए किसी भी सीमा तक गिर सकती है।

पुलिस कार्रवाई की तीखी निन्दा करने के बावजूद शांतिभूषण ने कहा कि प्रभावी लोकपाल विधेयक तैयार करने के लिए वह और उनके सहयोगी सरकार के साथ सहयोग करते रहेंगे। (भाषा)
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गलत किया मगर आदेश मानना मजबूरी
Jun 06, 01:19 am
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नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। शनिवार की रात रामलीला मैदान में जिन लोगों ने दिल्ली पुलिस का चेहरा देखा, उनके रोंगटे खड़े हो गए। चारों ओर पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की जा रही है। लोगों का कहना है कि आजादी के बाद देश की राजधानी में जलियावाला बाग कांड जैसी घटना को दोबारा देखा गया। हालांकि इस कांड पर दिल्ली पुलिस के कई डीसीपी व एसीपी समेत अन्य आला अधिकारियों का इस घटना पर कहना था कि वे तो सिर्फ सरकार के आदेश का पालन कर रहे हैं।

दबी जुबान में पुलिस अफसरों ने कहा कि वे अच्छी तरह समझ रहे हैं कि उनसे गलत कराया जा रहा है, लेकिन मजबूरी में उन्हें कार्रवाई करनी पड़ रही है।

पुलिस की दलीलों से साफ पता चल रहा था कि पूर्ण नियोजित व राजनीतिक दबाव में बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की गई। किंतु इस मसले पर पुलिस मुख्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान स्पेशल सीपी लॉ एंड ऑर्डर धर्मेद्र कुमार से जब राजनीतिक दबाव की बात पूछी गई तो उन्होंने ऐसा कुछ होने से इंकार कर दिया।
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मेरी हत्या की साजिश रची गई थी: रामदेव
Jun 05, 02:05 pm
बताएं

हरिद्वार। बीती मध्यरात्रि से जारी नाटकीय घटनाक्रमों के बाद बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रखने का ऐलान करते हुए रविवार को यहां सनसनीखेज दावा किया कि रामलीला मैदान पर उनकी हत्या करने की साजिश रची गई थी।

दिल्ली से हिरासत में लिए जाने के बाद रामदेव को चार्टर्ड प्लेन के जरिए देहरादून भेज दिया गया, जहां से वह हरिद्वार पहुंचे। यहां पहुंचने के कुछ ही देर बाद बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में रामदेव ने कल मध्यरात्रि के बाद हुए घटनाक्रमों का सिलसिलेवार ब्यौरा बताया और सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए।

रामदेव ने दावा किया कि सरकार की रामलीला मैदान पर लाशें बिछा देने की तैयारी थी और यदि हमारे कार्यकर्ता धैर्य से काम नहीं लेते तो वहां हजारों लोग मारे जाते।

उन्होंने कल की घटना की तुलना जलियांवाला बाग की घटना से करते हुए दावा किया, 'रामलीला मैदान पर मुझे गिरफ्तार करने के बाद मेरा एनकाउंटर करने या मुझे गायब कर देने की तैयारी थी। वहां मेरी हत्या करने की साजिश थी। जब तीन जून को दिल्ली के एक होटल में भी हमारी सरकार से बातचीत चल रही थी, तब भी रामलीला मैदान पर बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए थे।'

रामदेव ने कहा, 'यदि मेरे जीवन के समक्ष कोई खतरा उत्पन्न होता है तो इसकी जिम्मेदारी सोनिया गांधी और कांग्रेस की होगी।' उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी। लेकिन आगे क्या रणनीति अपनाई जाएगी, इस पर उन्होंने कहा कि वह शाम तक खुलासा करेंगे। उन्होंने कहा कि आज शाम और कल देश भर में उनके समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से 'काला दिवस' मनाएंगे।

योगगुरु ने कहा कि सरकार कालाधन पर अध्यादेश तो नहीं लाई, लेकिन उसने आपातकाल जैसा अत्याचार किया। योगगुरु के चेहरे पर परेशानी और चिंता साफ देखी जा सकती थी। वह महिलाओं की उसी पोशाक में मीडिया से मुखातिब हुए, जिसे पहनकर वह कल मध्यरात्रि के बाद रामलीला मैदान से बाहर निकले थे।

रामदेव ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत होने के बाद हमें यह धमकी दी गई थी कि या तो हम बात मान लें या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। इसलिए आचार्य बालकृष्ण से यह झूठ बोलकर दबाव में एक खत पर दस्तखत कराए गए कि चिट्ठी दिखाकर प्रधानमंत्री को विश्वास में लेना है।

उन्होंने कहा कि कल देर रात भी सरकार की ओर से जो चिट्ठी हमारे पास पहुंची, उसमें कालाधन के मुद्दे का कोई जिक्र नहीं था। उन्हाेंने कहा, 'कालीरात को जब मैं याद करता हूं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और मेरी आत्मा कांप उठती है। रामलीला मैदान पर कल मध्यरात्रि को जो हुआ वह बबर्रता की सारी हदें पार गया। मैंने वहां कार्रवाई करने आए पुलिसकर्मियों से निर्दोष महिलाओं और बच्चों पर लाठियां नहीं बरसाने का बार-बार अनुरोध किया, लेकिन रामलीला मैदान पर पुलिस का दमन चक्र चलता रहा।

रामदेव ने सीधे मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा, ''सिब्बल कुटिल और शातिर दिमाग के व्यक्ति हैं। उन्होंने हमारे साथ कुटिलता से चालें चलीं।' उन्होंने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बारे में भी कहा, 'जो लोग गैर-जिम्मेदार हैं और बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, उनके बारे में मैं टिप्पणी करना उचित नहीं समझता।'

आंदोलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा द्वारा प्रायोजित करने के आरोपों पर योगगुरु ने कहा कि उन्हें अन्य संगठनों और मुस्लिम समाज के लोगों का भी समर्थन था। तीन जून को तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने भी उनसे फोन पर बात कर समर्थन जताया था। अपने सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के बारे में उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में हैं और सुरक्षित हैं।

रामलीला मैदान पर सिर्फ योग शिविर करने की ही अनुमति होने से जुड़े सवाल पर रामदेव ने कहा कि योग के लिए हमने अनुमति ली थी और हजारों लोगों ने वहां योग किया भी। लेकिन योगासनों के बाद भ्रष्टाचार और कालाधन के मुद्दे पर जो उपवास किया गया, वह भी योग की मर्यादा और सीमा में आता है।

रामदेव ने कहा कि सरकार विदेशों में जमा कालाधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने, पेशेवर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में कराने, भ्रष्टाचार के मुकदमों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करने और लोक सेवा वितरण अधिनियम बनाने के लिए विधेयक पेश करने पर सहमत हो चुकी थी, लेकिन इस संबंध में वह लिखित आश्वासन नहीं दे रही थी।

उन्होंने कहा कि कालाधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने के बारे में अध्यादेश जारी करने को लेकर लिखित में आश्वासन नहीं देने के पीछे सरकार की यह दलील थी कि हम पहले अनशन खत्म कर दें।

रामदेव ने कहा कि सरकार के रुख से यह साफ होता है कि न न तो वह लोकपाल का गठन करना चाहती है और न न ही विदेशों में जमा कालाधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करना चाहती है। इसके पीछे कारण यह है कि कालाधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने से सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के कई नेता बेनकाब हो जाएंगे।

उन्होंने कहा, 'यह भी कहा जा रहा है कि मेरा अनशन प्रायोजित था। अगर प्रायोजित था तो फिर वहां मेरे समर्थकों पर लाठियां और आंसू गैस के गोले क्यों चलाए गए।'

सत्याग्रह पर सितम, इतिहास की सबसे काली रात


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सत्याग्रह पर सितम, इतिहास की सबसे काली रात

हरिद्वार, रविवार, 5 जून 2011( 15:38 IST )

दिल्ली के रामलीला मैदान से महिलाओं की वेशभूषा में बच निकलने का प्रयास करने वाले बाबा रामदेव ने चार जून की रात को इतिहास की काली रात बताते हुए कहा कि मुझे मारने की साजिश थी और रामलीला मैदान में मरना कोई बहादुरी का काम नहीं था इसलिए वहां से निकले।

सलवार कमीज पहने रामदेव ने कहा कि मैंने शौक के लिए यह कपड़े नहीं पहने हैं और मैं भेष बदलकर नहीं भागा लेकिन रामलीला मैदान में मारा जाना कोई बहादुरी नहीं थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मुझे मरवाने की योजना बना रखी थी और मैं रात को कार्रवाई के दौरान मंच से कूदकर एक दीवार के पास दो घंटे तक बैठा रहा।

दिल्ली से आज सुबह हरिद्वार पहुंचे योगगुरु ने कहा कि मरने से डरता तो यह काम नहीं करता लेकिन रामलीला मैदान में मरना कोई बहादुरी नहीं थी।

रामदेव ने कहा कि वहां महिलाओं का एक झुंड था वह उनके साथ शामिल होकर रामलीला मैदान से बाहर निकलने में सफल रहे और झुंड में ही पैदल चलने लगे, लेकिन कुछ कार्यकर्ताओं के मुंह से गलती से यह आवाज निकल गई कि ‘कोई पुलिस वाला नहीं आएगा’। इसके बाद पुलिस वाले सतर्क हो गए और उन्होंने मुझे पकड़ लिया।

बाबा ने कहा कि उनके गले में पड़े कपड़े को पुलिसकर्मियों ने फंदे की तरह पकड़ा, जिससे उनके गले में सूजन भी आ गए है। रामदेव के अनुसार कि मैंने पुलिस वालों से पूछा कि मैंने कालाधन, भ्रष्टाचार की बात करके कोई गुनाह नहीं किया है तो मेरे साथ अपराधी जैसा व्यवहार क्यों।

योगगुरु के चेहरे पर परेशानी और चिंता साफ देखी जा सकती थी। वह महिलाओं की उसी पोशाक में मीडिया से मुखातिब हुए, जिसे पहनकर वह कल मध्यरात्रि के बाद रामलीला मैदान से बाहर निकले थे।

रामदेव ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत होने के बाद हमें यह धमकी दी गई थी कि या तो हम बात मान लें या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। इसलिये आचार्य बालकृष्ण से यह झूठ बोलकर दबाव में एक खत पर दस्तखत कराए गए कि चिट्ठी दिखाकर प्रधानमंत्री को विश्वास में लेना है।

उन्होंने कहा कि कल देर रात भी सरकार की ओर से जो चिट्ठी हमारे पास पहुंची, उसमें कालेधन के मुद्दे का कोई जिक्र नहीं था।

उन्होंने कहा कि कालीरात को जब मैं याद करता हूं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और मेरी आत्मा कांप उठती है। रामलीला मैदान पर कल मध्यरात्रि को जो हुआ वह बबर्रता की सारी हदें पार गया। मैंने वहां कार्रवाई करने आए पुलिसकर्मियों से निर्दोष महिलाओं और बच्चों पर लाठियां नहीं बरसाने का बार-बार अनुरोध किया, लेकिन रामलीला मैदान पर पुलिस का दमन चक्र चलता रहा।

रामदेव ने सीधे मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘सिब्बल कुटिल और शातिर दिमाग के व्यक्ति हैं। उन्होंने हमारे साथ कुटिलता से चालें चलीं। उन्होंने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बारे में भी कहा कि जो लोग गैर-जिम्मेदार हैं और बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, उनके बारे में मैं टिप्पणी करना उचित नहीं समझता।

आंदोलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा द्वारा प्रायोजित करने के आरोपों पर योगगुरु ने कहा कि उन्हें अन्य संगठनों और मुस्लिम समाज के लोगों का भी समर्थन था। तीन जून को तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने भी उनसे फोन पर बात कर समर्थन जताया था। अपने सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के बारे में उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में हैं और सुरक्षित हैं।

रामलीला मैदान पर सिर्फ योग शिविर करने की ही अनुमति होने से जुड़े सवाल पर रामदेव ने कहा कि योग के लिए हमने अनुमति ली थी और हजारों लोगों ने वहां योग किया भी। लेकिन योगासनों के बाद भ्रष्टाचार और कालेधन के मुद्दे पर जो उपवास किया गया, वह भी योग की मर्यादा और सीमा में आता है।

रामदेव ने कहा कि सरकार विदेशों में जमा कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने, पेशेवर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में कराने, भ्रष्टाचार के मुकदमों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करने और लोक सेवा वितरण अधिनियम बनाने के लिए विधेयक पेश करने पर सहमत हो चुकी थी, लेकिन इस संबंध में वह लिखित आश्वासन नहीं दे रही थी।

उन्होंने कहा कि कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने के बारे में अध्यादेश जारी करने को लेकर लिखित में आश्वासन नहीं देने के पीछे सरकार की यह दलील थी कि हम पहले अनशन खत्म कर दें।

रामदेव ने कहा कि सरकार के रुख से यह साफ होता है कि न तो वह लोकपाल का गठन करना चाहती है और न न ही विदेशों में जमा कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करना चाहती है। इसके पीछे कारण यह है कि कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने से सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के कई नेता बेनकाब हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह भी कहा जा रहा है कि मेरा अनशन प्रायोजित था। अगर प्रायोजित था तो फिर वहां मेरे समर्थकों पर लाठियां और आंसू गैस के गोले क्यों चलाए गए। (भाषा)

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पतंजलि आश्रम पहुंचे बाबा रामदेव

नई दिल्ली, रविवार, 5 जून 2011( 12:17 IST )
बाबा रामदेव आज दिल्ली से विशेष विमान से देहरादून पहुंचे और वहां से उन्हें हरिद्वार स्थित पतंजलि आश्रम लाया गया। वे पूरी तरह सफेद कपड़ों में हैं। उन्होंने देहरादून एयरपोर्ट पर किसी से भी बातचीत नहीं की है।

योगगुरु बाबा रामदेव ने ओम् और गायत्री मंत्र का जाप करते हुए अपनी गिरफ्तारी दी थी। ऐतिहासिक रामलीला मैदान पर मध्यरात्रि के बाद करीब एक बजे जब पुलिस का दल बल पहुंचा तो बाबा ने पुलिस और अपने समर्थकों के बीच संभावित संघर्ष को टालने की भरपूर कोशिश की।

पुलिस बल के घेरे में रहते हुए भी बाबा ने अपने समर्थकों से कहा कि वे उत्तेजित नहीं हों। उन्होंने लोगों से ओम् और गायत्री मंत्र का उच्चारण भी कराया।

गिरफ्तारी के नाटकीय घटनाक्रम में लाठीचार्ज, पथराव और आंसूगैस के गोले छोड़े गए तथा मैदान पर अफरातफरी मच गई। इसी बीच पुलिस बाबा को मंच से हटाकर एक ओर ले गई।

चंडीगढ़ से आई एक बुजुर्ग महिला ने पुलिस कार्रवाई का आंखों देखा हाल बताते हुए कहा कि महिलाएं और बच्चे पुलिस ज्यादती का शिकार हुए। पुलिस ने बुजुर्ग महिला को भी मैदान से चले जाने को कहा।

महिला ने जब यह कहा कि वह चंडीगढ़ से आई है और कहां जाये तो पुलिसकर्मी ने बदतमीजी से कहा कि सड़क पर जाओ।

बाबा के एक निकट सहयोगी सम्पूर्णानंद के अनुसार पुलिस बल में एक भी महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। मध्यरात्रि के बाद सारे नियम कायदों को ताक पर रख कर पुलिस कार्रवाई की गई।

बाबा के संगठन भारत स्वाभिमान आंदोलन के एक पदाधिकारी के अनुसार वह भारत के मुख्य न्यायाधीश एचएस कपाड़िया से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को पुलिस कार्रवाई का संज्ञान लेना चाहिए। (एजेंसी)


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मेरी हत्या की साजिश-रामदेव
कहा- ...तो सोनिया और कांग्रेस जिम्मेदार

हरिद्वार, रविवार, 5 जून 2011( 22:33 IST )

बीती मध्यरात्रि से जारी नाटकीय घटनाक्रमों के बाद बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रखने की घोषणा करते हुए रविवार को यहां सनसनीखेज दावा किया कि रामलीला मैदान पर उनकी हत्या करने की साजिश रची गई थी।

दिल्ली से हिरासत में लिए जाने के बाद रामदेव को हेलिकॉप्टर के जरिए देहरादून भेज दिया गया, जहां से वे हरिद्वार पहुंचे। यहां पहुंचने के कुछ ही देर बाद बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में रामदेव ने कल मध्यरात्रि के बाद हुए घटनाक्रमों का सिलसिलेवार ब्योरा बताया और सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए।

लाशें बिछा देने की तैयारी थी : रामदेव ने दावा किया कि सरकार की रामलीला मैदान पर लाशें बिछा देने की तैयारी थी और यदि हमारे कार्यकर्ता धैर्य से काम नहीं लेते तो वहां हजारों लोग मारे जाते।

याद आया जलियांवाला : उन्होंने कल की घटना की तुलना जलियांवाला बाग की घटना से करते हुए दावा किया कि रामलीला मैदान पर मुझे गिरफ्तार करने के बाद मेरा एनकाउंटर करने या मुझे गायब कर देने की तैयारी थी। वहां मेरी हत्या करने की साजिश थी। जब तीन जून को दिल्ली के एक होटल में भी हमारी सरकार से बातचीत चल रही थी, तब भी रामलीला मैदान पर बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए थे।

...तो सोनिया जिम्मेदार : रामदेव ने कहा कि यदि मेरे जीवन के समक्ष कोई खतरा उत्पन्न होता है तो इसकी जिम्मेदारी सोनिया गांधी और कांग्रेस की होगी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी, लेकिन आगे क्या रणनीति अपनायी जाएगी, इसका जल्द ही खुलासा करेंगे।

आपातकाल जैसा अत्याचार : योगगुरु ने कहा कि सरकार कालेधन पर अध्यादेश तो नहीं लाई, लेकिन उसने आपातकाल जैसा अत्याचार किया। योगगुरु के चेहरे पर परेशानी और चिंता साफ देखी जा सकती थी। वे महिलाओं की उसी पोशाक में मीडिया से मुखातिब हुए, जिसे पहनकर कल मध्यरात्रि के बाद रामलीला मैदान से बाहर निकले थे।

हमें धमकी दी गई थी : रामदेव ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत होने के बाद हमें यह धमकी दी गई थी कि या तो हम बात मान लें या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। इसलिए आचार्य बालकृष्ण से यह झूठ बोलकर दबाव में एक खत पर दस्तखत कराए गए कि चिट्ठी दिखाकर प्रधानमंत्री को विश्वास में लेना है। उन्होंने कहा कि कल देर रात भी सरकार की ओर से जो चिट्ठी हमारे पास पहुंची, उसमें कालेधन के मुद्दे का कोई जिक्र नहीं था।

कांप जाती है आत्मा : उन्होंने कहा कि कालीरात को जब मैं याद करता हूं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और मेरी आत्मा कांप उठती है। रामलीला मैदान पर कल मध्यरात्रि को जो हुआ वह बर्बरता की सारी हदें पार गया। मैंने वहां कार्रवाई करने आए पुलिसकर्मियों से निर्दोष महिलाओं और बच्चों पर लाठियां नहीं बरसाने का बार-बार अनुरोध किया, लेकिन रामलीला मैदान पर पुलिस का दमन चक्र चलता रहा।

कुटिल हैं कपिल सिब्बल : रामदेव ने सीधे मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा कि सिब्बल कुटिल और शातिर दिमाग के व्यक्ति हैं। उन्होंने हमारे साथ कुटिलता से चालें चलीं। उन्होंने कांग्रेस महासचिव दिग्विजयसिंह के बारे में भी कहा कि जो लोग गैर-जिम्मेदार हैं और बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, उनके बारे में मैं टिप्पणी करना उचित नहीं समझता।

आंदोलन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा द्वारा प्रायोजित करने के आरोपों पर योगगुरु ने कहा कि उन्हें अन्य संगठनों और मुस्लिम समाज के लोगों का भी समर्थन था। तीन जून को तेलुगू देशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने भी उनसे फोन पर बात कर समर्थन जताया था। अपने सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के बारे में उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में हैं और सुरक्षित हैं।

हमने नहीं लांघी मर्यादा : रामलीला मैदान पर सिर्फ योग शिविर करने की ही अनुमति होने से जुड़े सवाल पर रामदेव ने कहा कि योग के लिए हमने अनुमति ली थी और हजारों लोगों ने वहां योग किया भी, लेकिन योगासनों के बाद भ्रष्टाचार और कालेधन के मुद्दे पर जो उपवास किया गया, वह भी योग की मर्यादा और सीमा में आता है।

रामदेव ने कहा कि सरकार विदेशों में जमा कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने, पेशेवर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं भारतीय भाषाओं में कराने, भ्रष्टाचार के मुकदमों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करने और लोकसेवा वितरण अधिनियम बनाने के लिए विधेयक पेश करने पर सहमत हो चुकी थी, लेकिन इस संबंध में वह लिखित आश्वासन नहीं दे रही थी।

उन्होंने कहा कि कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने के बारे में अध्यादेश जारी करने को लेकर लिखित में आश्वासन नहीं देने के पीछे सरकार की यह दलील थी कि हम पहले अनशन खत्म कर दें।

...तो बेनकाब होंगे मंत्री और कांग्रेस नेता : रामदेव ने कहा कि सरकार के रुख से यह साफ होता है कि न तो वह लोकपाल का गठन करना चाहती है और न ही विदेशों में जमा कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करना चाहती है। इसके पीछे कारण यह है कि कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने से सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के कई नेता बेनकाब हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह भी कहा जा रहा है कि मेरा अनशन प्रायोजित था। अगर प्रायोजित था तो फिर वहां मेरे समर्थकों पर लाठियां और आंसू गैस के गोले क्यों चलाए गए। (भाषा)

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रात में तेजी से बदला घटनाक्रम
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रविवार, 5 जून 2011( 10:24 IST )
राजधानी दिल्ली में मध्यरात्रि की पुलिस कार्रवाई के कुछ घंटे पहले और कुछ घंटे बाद का घटनाक्रम घड़ी की इन सुइयों के साथ हुआ।

* दस बजे बाबा को विमान से देहरादून ले जाया।
* सुबह लगभग 9 बजे रामदेव सफदरगंज हवाईअड्डे पर दिखाई दिए। दिल्ली से बाहर ले जाने की तैयारी।
* 5.00 बजे रामलीला मैदान लगभग खाली हो गया।
* तड़के 4.10 बजे रामलीला मैदान पर बिजली काटी गई।
* 3.15-4.00 बजे के बीच पुलिस ने मंच और टेंटों को उखाड़ना शुरू कर दिया।
* 2.45 से 3.15 बजे के बीच पुलिस बाबा को गिरफ्तार कर अज्ञात स्थान पर ले गई।
* मध्यरात्रि के बाद 2.00 से 3.00 बजे के बीच पुलिस ने रामलीला मैदान पर आंसूगैस के गोले छोड़े। समर्थकों की भीड़ तितर-बितर हो गई।
* 2.00 से 2.30 बजे बाबा अपने समर्थकों के पास मंच पर गए। पुलिस ने मंच को घेरे में ले लिया। समर्थकों ने पुलिसकर्मियों को मंच पर चढ़ने से रोका।
* मध्यरात्रि के बाद 1.15 पुलिस बल मंच पर पहुंचा जहां बाबा सोए हुए थे। बाबा के समर्थकों ने उन्हें अपने घेरे में ले लिया तथा मंच के नीचे ले गए। समर्थकों ने बाबा को कंधे पर उठा लिया।
* पांच जून मध्यरात्रि के बाद 12.30 बजे से एक बजे : सैंकडों पुलिस कर्मियों ने रामलीला मैदान पर धावा बोला। पुलिस अधिकारियों ने बाबा को गिरफतार करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनके पास मैदान को सवेरे तक खाली कराने के आदेश हैं।
* शाम साढ़े सात बजे सरकार की कार्रवाई से क्षुब्ध बाबा रामदेव ने सरकार पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया और अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने की घोषणा की।
* शाम सवा सात बजे केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने प्रेस कांफ्रेंस में बाबा रामदेव का कथित पत्र सार्वजनिक किया।
* चार जून शाम सात बजे सरकार ने बाबा रामदेव को फोनकर मानी मांग। (वार्ता/वेबदुनिया न्
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